कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने एक्स पर एक पोस्ट शेयर किया. इसमें उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संसद में आने से पहले केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को बर्खास्त करना चाहिए. खरगे ने पोस्ट में कहा कि जब संसद चल रही होती है तो प्रधानमंत्री को संसद के पटल पर वक्तव्य देना होता है. देर रात एक वीडियो बनाकर, संसद के बाहर एकतरफा ‘मन की बात’ नहीं करनी होती.
मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री मोदी को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘आज संसद में आने से पहले, धर्मेंद्र प्रधान को बर्खास्त करके आइएगा. पहले छात्रों से माफी मांगिए और जिन्होंने छात्रों की आवाज दबाने के लिए लाठी-डंडों और ‘पैलेट गन’ का इस्तेमाल करवाया है, उन पर कड़ी कार्रवाई कीजिए.
आगे कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि इसके बाद फिर हम शिक्षा व्यवस्था पर विस्तृत चर्चा के लिए तैयार हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो जारी करके क्या कहा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार (23 जुलाई) को कहा था कि प्रश्नपत्र लीक रोकने के लिए कड़े प्रावधानों वाला विधेयक अगले सप्ताह संसद में पेश किया जाएगा. उन्होंने बताया कि केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस विधेयक को मंजूरी मिल चुकी है. पीएम मोदी ने कहा कि नीट पेपर लीक मामले के बाद सरकार ने कई अहम कदम उठाए हैं, जिनमें मामलों की जल्द सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक अदालतों की व्यवस्था भी शामिल है. उन्होंने कहा कि पेपर लीक के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है और कई आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है.
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सोनिया गांधी ने आरोप लगाया, ‘‘मोदी सरकार ने उनकी बहादुरी का जवाब कायरता और निर्मम क्रूरता से दिया है, उनके साथ भविष्य के कर्णधारों की तरह नहीं, बल्कि देश के शत्रुओं की तरह व्यवहार किया है.’’
सोनिया गांधी ने छात्र आंदोलन पर क्या कहा?
कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी ने शुक्रवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में गिरावट के खिलाफ आवाज उठाने वाले छात्रों के साथ सरकार का रवैया ठीक नहीं है. उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों को नरेंद्र मोदी सरकार ऐसे पेश कर रही है, जैसे वे देश के दुश्मन हों और उनकी आवाज दबाने के लिए दमनकारी कदम उठाए जा रहे हैं. सोनिया गांधी ने अंग्रेजी अखबार ‘द हिंदू’ में लिखे अपने लेख में कहा कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों की मांगें बिल्कुल स्पष्ट हैं. वे सिर्फ सरकार से जवाबदेही तय करने और देश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे हैं.
