LRLACM Missile: रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने सोमवार (15 जून) को ओडिशा स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से लंबी दूरी की लैंड अटैक क्रूज मिसाइल (LRLACM) का सफल परीक्षण किया. परीक्षण के दौरान मिसाइल ने अपने सभी तय लक्ष्य पूरे किए. डीआरडीओ ने बताया कि Integrated Test Range में तैनात विभिन्न ट्रैकिंग उपकरणों से मिले आंकड़ों के विश्लेषण से इसकी पुष्टि हुई कि मिसाइल ने तय मानकों के अनुसार प्रदर्शन किया.
रक्षा मंत्रालय ने अपने एक बयान में कहा कि लंबी दूरी की लैंड अटैक क्रूज मिसाइल स्वदेशी तकनीकों के भरोसे और क्षमता को प्रमाणित किया है. इस सफलता ने भारत की लंबी दूरी तक सटीक हमला करने की बढ़ती सामरिक क्षमता का भी प्रदर्शन किया है. मंत्रालय ने कहा कि यह उपलब्धि आत्मनिर्भर भारत पहल को मजबूत करने और देश के रक्षा उत्पादन के साथ तकनीकी को और सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से विकसित है LRLACM
LRLACM एक स्वदेशी रूप से विकसित लंबी दूरी की लैंड अटैक क्रूज मिसाइल है. इसकी सभी प्रमुख उप-प्रणालियों का विकास डीआरडीओ की प्रयोगशाला और भारतीय उद्योग भागीदारों के सहयोग से किया गया है. मिसाइल के विकास में Aeronautical Development Establishment, बेंगलुरु ने नोडल प्रयोगशाला के रूप में अहम भूमिका निभाई है.
रक्षा मंत्री ने दी बधाई
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एलआरएलएसीएम (LRLACM) के सफल परीक्षण पर DRDO की टीम और उद्योग भागीदारों को बधाई दी है. उन्होंने इसे देश की रक्षा क्षमताओं को और अधिक ताकतवर बनने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है. वहीं मिसाइल परीक्षण के समय डीआरडीओ के वरिष्ठ अधिकारी, भारतीय नौसेना और भारतीय वायु सेना के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे.
भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम
LRLACM का सफल परीक्षण भारत की स्वदेशी रक्षा तकनीक और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है. यह मिसाइल आने वाले समय में भारतीय सेना की सामरिक क्षमता को और अधिक मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकता है.
BMD प्रणाली का भी सफल परीक्षण
इससे पहले भारत ने 10 और 11 जून को अपनी बहुस्तरीय बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा (BMD) प्रणाली के तीन सफल परीक्षण किया था. डीआरडीओ की ओर से विकसित इस प्रणाली ने वायुमंडल के भीतर और बाहर दोनों स्तरों पर लक्ष्य मिसाइलों को सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट कर दिया था. इसके साथ ही भारत अमेरिका, रूस और चीन जैसे चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है, जिनके पास अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों (ICBM) को रोकने की क्षमता है. रक्षा मंत्रालय के मुताबिक यह प्रणाली दुश्मनों की लंबी दूरी की परमाणु मिसाइलों और उन्नत हवाई खतरों से देश की सुरक्षा को और मजबूत करेगी.
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