Liquor Scam: केंद्र के फैसले से केजरीवाल को लग सकता है झटका

चुनाव के बीच प्रवर्तन निदेशालय को केस चलाने की मंजूरी मिलने से केजरीवाल को झटका लग सकता है. केजरीवाल ने मंजूरी नहीं मिलने का हवाला देते हुए विशेष अदालत के आरोपपत्र पर संज्ञान लेने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. गृह मंत्रालय से मुकदमा चलाने की मंजूरी मिलने के बाद विशेष अदालत में केजरीवाल के खिलाफ आरोप तय होंगे.

Liquor Scam: दिल्ली विधानसभा को लेकर चुनाव प्रचार तेज हो गया है. चुनाव के बीच आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के लिए परेशानी वाली खबर आयी है. चुनाव के बीच केंद्र सरकार ने शराब घोटाले में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी प्रवर्तन निदेशालय को दे दी है. यह मंजूरी ऐसे समय में आयी है जब आम आदमी पार्टी की ओर से अरविंद केजरीवाल मुख्यमंत्री के उम्मीदवार हैं. भाजपा ने इस बार किसी को मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित नहीं किया है और केजरीवाल लगातार पूछ रहे हैं कि भाजपा की ओर से कौन मुख्यमंत्री उम्मीदवार होगा.

आम आदमी पार्टी केजरीवाल बनाम कौन के मुद्दे को हवा देकर अपने पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश में जुटी है. वहीं भाजपा और कांग्रेस यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने केजरीवाल को जमानत देते समय कई तरह की पाबंदी लगायी है और वे दोबारा मुख्यमंत्री नहीं बन सकते हैं. इस आरोप-प्रत्यारोप के बीच केजरीवाल ने बुधवार को नयी दिल्ली सीट से नामांकन दाखिल किया. चुनाव के बीच प्रवर्तन निदेशालय को केस चलाने की मंजूरी मिलने से आम आदमी पार्टी और केजरीवाल को झटका लग सकता है.

केजरीवाल ने पहले मंजूरी नहीं मिलने का हवाला देते हुए विशेष अदालत के आरोपपत्र पर संज्ञान लेने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. लेकिन गृह मंत्रालय से मुकदमा चलाने की मंजूरी मिलने के बाद कानूनी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अब विशेष अदालत में केजरीवाल और सिसोदिया के खिलाफ आरोप तय होंगे. 


क्या मंजूरी का चुनाव पर पड़ सकता है असर


इस मामले में विशेष अदालत में 30 जनवरी को सुनवाई होनी है. सुनवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय मंजूरी का हवाला देकर केजरीवाल और सिसोदिया के खिलाफ आरोप तय करने की मांग कर सकता है. आरोप तय होने पर दोनों के खिलाफ सुनवाई शुरू हो जायेगी. दिल्ली में मतदान पांच फरवरी को होना है. ऐसे में चुनाव के बीच में केजरीवाल के खिलाफ आरोप तय होने का चुनाव पर असर पड़ना तय है. भाजपा और कांग्रेस इस मुद्दे पर आम आदमी को घेरने के लिए आक्रामक अभियान चला सकते हैं. शराब घोटाले के आरोप के कारण पहले से केजरीवाल और आम आदमी पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा है.

पिछले साल सितंबर महीने में ट्रायल में देरी होने के आधार पर केजरीवाल को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली थी, जबकि सिसोदिया को भी सुप्रीम कोर्ट से इसी आधार पर जमानत मिली थी. विशेष अदालत में आरोप तय होने के बाद केजरीवाल के लिए चुनाव जीतने के बाद भी मुख्यमंत्री के पद पर आसीन होना कानूनी तौर पर मुश्किल पैदा कर सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने केजरीवाल को जमानत देते हुए कई तरह की शर्तें लगायी है. इन शर्तों के कारण ही केजरीवाल को मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा था.

ऐसे में निचली अदालत में सुनवाई में देरी को आधार बनाकर केजरीवाल सुप्रीम कोर्ट से जमानत की शर्तों में ढील देने की मांग कर सकते थे. लेकिन सुनवाई शुरू होने पर ऐसा संभव नहीं होगा. इस मामले में सीबीआई को भी मुकदमा चलाने की मंजूरी पहले ही मिल चुकी है. 

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Author: Vinay Tiwari

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