किसान महापंचायत: दिल्ली के रामलीला मैदान में 'किसान महापंचायत' जारी, MSP पर कानूनी गारंटी की मांग

दिल्ली पुलिस ने रामलीला मैदान में होने वाली किसान महापंचायत को लेकर सुरक्षा बढ़ा दी है. करीब दो हजार सुरक्षाकर्मियों सुरक्षा में तैनात किये गये हैं. लोगों और वाहन चालकों को सलाह दी जाती है कि वे रामलीला मैदान के आसपास खासतौर पर दिल्ली गेट से अजमेरी गेट चौक के बीच जेएलएन मार्ग पर जाने से बचें.

दिल्ली के रामलीला मैदान में ‘किसान महापंचायत’ जारी है. किसान एमएसपी पर कानूनी गारंटी और अपनी अन्य मांगों को पूरा करने की मांग को लेकर यहां एकत्र हुए हैं. जिसमें देशभर से करीब हजारों की संख्या में किसान शामिल हुए हैं. संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने बताया कि रामलीला मैदान में होने वाली ‘किसान महापंचायत’ (Kisan Mahapanchayat) में हिस्सा लेने के लिए पूरे देश से लाखों किसानों ने राष्ट्रीय राजधानी के लिए कूच किया है. खबर आ रही है कि किसानों के प्रतिनिधिमंडल से केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर मिल सकते हैं. किसान कृषि मंत्री से अपनी मांग रखेंगे.

क्या है किसानों की मांग

विभिन्न किसान संगठनों के संयुक्त मंच एसकेएम ने बताया कि किसान महापंचायत कृषि उत्पादों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गांरटी को लेकर दबाव बनाने के लिए बुलाई गई है. एसकेएम नेता दर्शन पाल ने कहा, केंद्र सरकार को 9 दिसंबर 2021 को हमें लिखित में दिए गए आश्वासन को पूरा करना चाहिए और साथ ही किसानों के सामने बढ़ते संकट को दूर करने के लिए कदम उठाने चाहिए. एसकेएम ने केंद्र से एमएसपी पर गठित समिति को भंग करने की मांग की और आरोप लगाया है कि वह किसानों की मांग के विपरीत है. किसानों ने पेंशन देने, कर्ज माफी, किसान आंदोलन के दौरान मारे गए किसानों को मुआवजा देने और बिजली विधेयक वापस लेने की मांग की है.

दिल्ली में बढ़ायी गयी सुरक्षा

दिल्ली पुलिस ने रामलीला मैदान में होने वाली किसान महापंचायत को लेकर सुरक्षा बढ़ा दी है. करीब दो हजार सुरक्षाकर्मियों सुरक्षा में तैनात किये गये हैं. यातायात पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि लोगों और वाहन चालकों को सलाह दी जाती है कि वे रामलीला मैदान के आसपास खासतौर पर दिल्ली गेट से अजमेरी गेट चौक के बीच जेएलएन मार्ग पर जाने से बचें.

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तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसान ने किया था प्रदर्शन

गौरतलब है कि एसकेएम ने अब वापस हो चुके तीन कृषि कानूनों के खिलाफ करीब एक साल तक हुए किसान आंदोलन का नेतृत्व किया था. एसकेएम ने दिसंबर 2021 में अपना आंदोलन सरकार से प्रदर्शन के दौरान किसानों पर दर्ज मुकदमों को वापस लेने और एमएसपी की गारंटी सहित उनकी लंबित मांगों पर विचार करने का आश्वासन मिलने के बाद वापस ले लिया था.

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लेखक के बारे में

By ArbindKumar Mishra

अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.

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