Jharkhand Health System, पश्चिमी सिंहभूम (अनिल तिवारी): पश्चिमी सिंहभूम जिले के बंदगांव में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था के दावों की पोल खोलती एक विचलित करने वाली घटना सामने आयी है. मामला अनुमंडल अस्पताल चक्रधरपुर की है, जहां प्रबंधन की लापरवाही और संवेदनहीनता के कारण एक पिता अपने नवजात शिशु के शव को कार्डबोर्ड के डिब्बे में भरकर घर ले जाने के लिए मजबूर हो गया. घटना के बाद इलाके में स्वास्थ्य विभाग के प्रति भारी आक्रोश व्याप्त है.
अस्पताल की लापरवाही के कारण हो गयी नवजात की मौत
जानकारी के अनुसार कराईकेला थाना क्षेत्र अंतर्गत बंगरासाई गांव निवासी रामकृष्ण हेंब्रम ने तीन दिन पहले अपनी पत्नी रीता तिरिया को प्रसव के लिए चक्रधरपुर अनुमंडल अस्पताल में भर्ती कराया था. शनिवार को रीता ने एक बच्चे को जन्म दिया, लेकिन परिजनों का आरोप है कि अस्पताल की लापरवाही के कारण नवजात की मौत हो गयी.
शव को ले जाने के लिए नहीं दी गयी कोई सुविधा
परिजनों का कहना है कि बच्चे की मौत के बाद अस्पताल कर्मियों ने सांत्वना देने के बजाय रामकृष्ण हेंब्रम पर शव को तुरंत अस्पताल से ले जाने का दबाव बनाया. जब पीड़ित पिता ने इसके लिए घर एंबुलेंस या किसी साधन की मांग की, तो उसे कोई सुविधा उपलब्ध नहीं करायी गयी.
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रामकृष्ण हेंब्रम शव को खाली कार्डबोर्ड में रखकर चल दिये घर
गरीबी और जानकारी के अभाव में मजबूर होकर रामकृष्ण हेंब्रम ने अपने बेटे के शव को एक खाली कार्डबोर्ड के डिब्बे में रखा और उसे लेकर घर के लिए निकल पड़े. यह दृश्य देखने के बाद इलाके के लोगों में गहरा आक्रोश है. ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों के साथ अक्सर दुर्व्यवहार किया जाता है. यदि स्वास्थ्य विभाग चाहता तो मानवीय आधार पर एंबुलेंस से शव को घर तक पहुंचाया जा सकता था, लेकिन विभाग की संवेदनहीनता ने गरीब परिवार को इस दर्दनाक स्थिति में डाल दिया.
पीड़ित परिवार और ग्रामीणों ने प्रशासन से की कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों और पीड़ित परिवार ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य मंत्री से मांग की है कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच करायी जाये. साथ ही दोषी स्वास्थ्य कर्मियों और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कर पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए, ताकि भविष्य में किसी अन्य गरीब परिवार को ऐसी अमानवीय स्थिति का सामना न करना पड़े.
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