सरायकेला से प्रताप मिश्रा की रिपोर्ट
Womens Day: झारखंड में सरायकेला की महिला छऊ इंस्ट्रक्टर कुसमी पटनायक सरायकेला शैली छऊ की नई पौध तैयार कर रही हैं. वह यह काम पिछले तीन सालों से कर रही हैं. अपने ही घर पर छऊ प्रशिक्षण केंद्र खोलकर बच्चियों को छऊ की ककहरा सीखा रही हैं. देश के विभिन्न शहरों में खुद नृत्य प्रस्तुत कर चुकी कुसमी ने महज छह साल की उम्र में इस कला को आत्मसात कर लिया था.
10 साल की उम्र से प्रस्तुति दे रही हैं कुसमी
कुसमी पटनायक ने महज 10 साल उम्र से उन्होंने प्रस्तुति देना शुरू कर दिया था. कुसमी रांची, जमशदेपुर, देवघर के अलावे केरल, अंडमान निकोबार, हरियाणा, कोलकाता, मुंबई, दिल्ली और गोवा सहित देश के दर्जनों शहरों में छऊ नृत्य प्रस्तुत कर चुकी हैं.
मामा से सीखीं छऊ नृत्य
कुसुमी ने बताया कि उन्होंने अपने मामा और राजकीय छऊ नृत्य कला केंद्र के तत्कालीन निदेशक तपन पटनायक को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर छऊ नृत्य करते देखा. उन्होंने बताया कि उनके मामा को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई सम्मान मिले. उन्हें देखकर ही कुसुमी पटनायक के अंदर भी छऊ नृत्य सीखने की लालसा जगी. इसके बाद उन्होंने अपने मामा को गुरु बना लिया और उनके निर्देशन में छऊ नृत्य सीखी.
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नृत्य की दूसरी विधा में भी पारंगत हैं कुसमी
कुसमी पटनायक न केवल छऊ नृत्य ही जानती हैं, बल्कि वह राधा-कृष्ण, चंद्रभागा, हर पार्वती के साथ-साथ परिखंडा नृत्य में भी पारंगत है. तीन साल पहले वह घर पर अपना प्रशिक्षण केंद्र खोलकर बच्चों को छऊ सीखा रही हैं. कुसमी ने बताया कि वह इस कला को दूसरों को भी सीखना चाहती हैं, विशेषकर महिलाओं को, ताकि महिलाएं भी छऊ के क्षेत्र में आगे आ सकें. इसलिए प्रशिक्षण केंद्र में वह महिलाओं को छऊ नृत्य सिखा रही हैं.
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