कश्मीरी पंडितों को मिली आतंकियों की धमकी, फारूक अब्दुल्ला बोले- दाल में कुछ काला है

जम्मू-कश्मीर में स्वतंत्रता दिवस से पहले कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को कथित आतंकी धमकी के मामले ने तूल पकड़ लिया है. नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार और उपराज्यपाल मनोज सिन्हा पर सवाल उठाए हैं.

जम्मू-कश्मीर में स्वतंत्रता दिवस से पहले सरकारी विभागों में काम करने वाले कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को कथित तौर पर आतंकियों की ओर से धमकी मिलने का मामला सामने आया है. नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने इस मामले को लेकर केंद्र सरकार और जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा पर निशाना साधा. एएनआई न्यूज एजेंसी के मुताबिक, उन्होंने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी उपराज्यपाल के पास है और गृह मंत्रालय को इस मामले को गंभीरता से देखना चाहिए.

कश्मीरी पंडितों, खासकर यहां सरकारी दफ्तरों में काम करने वाले लोगों को धमकी मिली है. मैं हैरान हूं कि इन्हें ही धमकी क्यों मिली? यह धमकी कहां से आई? यहां सिर्फ कश्मीरी पंडित ही नहीं हैं, दूसरे लोग भी हैं. हिंदू अधिकारी भी हैं और अलग-अलग पार्टियों के नेता भी हैं. फिर सिर्फ इन्हीं लोगों को धमकी क्यों मिली? - फारूक अब्दुल्ला

इन लोगों को ही धमकी क्यों?

फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि मैं समझता हूं कि इसकी वजह यह है कि सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार के पास नहीं है, बल्कि लेफ्टिनेंट गवर्नर साहब मनोज सिंहा के पास है. मेरा मानना है कि भारत के गृह मंत्रालय को इस मामले पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए और पता लगाना चाहिए कि ये लोग कौन हैं, जो इस तरह की धमकियां दे रहे हैं.उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए धमकी देने वालों की पहचान करने की मांग की.

दाल में कुछ काला है

फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि उन्हें इस पूरे मामले में दाल में कुछ काला नजर आ रहा है. उन्होंने कहा कि सरकार को पता लगाना चाहिए कि धमकी देने वाले लोग कौन हैं और सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर इस तरह की धमकियां कौन दे रहा है.

कश्मीरी पंडितों की वापसी पर भी उठाया सवाल

कश्मीरी पंडितों की घर वापसी और ट्रांजिट कैंप में सुविधाओं को लेकर पूछे गए सवाल पर अब्दुल्ला ने कहा कि समुदाय के सामने कई समस्याएं हैं. उन्होंने कहा कि उनसे किए गए वादों को पूरा किया जाना चाहिए.

ट्रांजिट कैंप में बसाना समाधान नहीं

फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि कश्मीरी पंडितों को ट्रांजिट कैंप में बसाना स्थायी समाधान नहीं है. उन्होंने दावा किया कि मनमोहन सिंह सरकार के समय और उमर अब्दुल्ला के कार्यकाल में कश्मीरी पंडितों को वापस लाने और रोजगार देने की कोशिशें हुई थीं. उन्होंने कहा कि कश्मीरी पंडितों का कश्मीर के लोगों के साथ रहना जरूरी है और उनके खिलाफ कभी कोई नीति नहीं रही.

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By सत्येन्द्र गिरि

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