लिंगायत समुदाय का बेलगावी में शक्ति प्रदर्शन, महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा पर भारी पुलिस बल तैनात

आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन का नेतृत्व कर रहे कुदालसंगम पंचमसाली पीठ के संत बसव जया मृत्युंजय स्वामी ने कहा, अगर मुख्यमंत्री हमें आरक्षण देकर न्याय करते हैं, तो हम उनका सम्मान करेंगे, अगर उन्होंने फैसले में देरी की, तो हम सुवर्ण विधानसौध के सामने प्रदर्शन करेंगे.

कर्नाटक-महाराष्ट्र सीमा विवाद के बीच बेलगावी में भारी पुलिस बल की तैनाती कर दी गयी है. ऐसा इसलिए क्योंकि लिंगायत समुदाय के लोगों ने आरक्षण की मांग को लेकर पंचमसाली यात्रा शुरू की है. लिंगायत समुदाय के उप वर्ग ने केंद्र सरकार से ओबीसी दर्जा दिये जाने की मांग कर रहा है. पंचमसाली समुदाय अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण मैट्रिक्स की श्रेणी 2ए (15 प्रतिशत) में शामिल होना चाहता है. वे वर्तमान में 3बी (5 प्रतिशत) के तहत शामिल हैं.

लिंगायत समुदाय का पंचमसाली पदयात्रा, बेलगावी में शक्ति प्रदर्शन

कुंडलसंगम पीठ के जगद्गुरु बसव जाया मृत्युंजय स्वामीजी के नेतृत्व में प्रस्तावित पंचमसाली पदयात्रा के कारण कर्नाटक के बेगलगाम में हिरेबगेवाड़ी में भारी पुलिस तैनात कर दी गयी है. पुलिस अधिकारी ने बताया कि पंचमसाली पदयात्रा हिरबगेवाड़ी से सुवर्णसौधा तक मेले का रूप ले लेगी. पंचमसाली लिंगायतों ने बेलगावी में शक्ति प्रदर्शन के रूप में एक विशाल सम्मेलन का आयोजन किया है. आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन का नेतृत्व कर रहे कुदालसंगम पंचमसाली पीठ के संत बसव जया मृत्युंजय स्वामी ने कहा, अगर मुख्यमंत्री हमें आरक्षण देकर न्याय करते हैं, तो हम उनका सम्मान करेंगे, अगर उन्होंने फैसले में देरी की, तो हम सुवर्ण विधानसौध के सामने प्रदर्शन करेंगे.

कौन हैं लिंगायत और क्या है उनकी परंपरा

लिंगायत और वीरशैव कर्नाटक के दो बड़े समुदाय हैं. दोनों का जन्म 12वीं शताब्दी के समाज सुधार आंदोलन के दौरान हुआ. लिंगायत पहले हिंदू धर्म को ही मानते थे, लेकिन इसकी कुरीतियों को हटाने के लिए नये सप्रदाय को मानने लगे. लिंगायत समुदाय के लोग ने तो मूर्ति पूजा करते हैं और न ही वेदों में विश्वास करते हैं. लिंगायत शिव की पूजा तो नहीं करते, लेकिन इष्टलिंग के रूप में अलग तरीके से पूजा करते हैं. लिंगायत में अंतिम संस्कार की प्रक्रिया भी अलग है. लिंगायत समुदाय में शवों को जलाया नहीं जाता, बल्कि उसे दफनाने की परंपरा है. लिंगायत खुद को हिंदू धर्म से अलग करने की मांग करते रहे हैं.

Also Read: कर्नाटकः लिंगायत मठ में मुख्य पुजारी के पद पर मुस्लिम युवक की नियुक्ति, इष्ट लिंग धारण किया

कर्नाटक-महाराष्ट्र सीमा विवाद चरम पर

कर्नाटक और महाराष्ट्र के बीच सीमा विवाद चरम पर है. दोनों राज्यों के 1957 में भाषाई आधार पर पुनर्गठन के बाद से सीमा विवाद जारी है. महाराष्ट्र बेलगावी पर अपना दावा करता है, जो तत्कालीन बॉम्बे प्रेसीडेंसी का हिस्सा था, क्योंकि मराठी भाषी आबादी का एक बड़ा हिस्सा वहां रहता है. वह उन 800 से अधिक मराठी भाषी गांवों पर भी दावा करता है, जो वर्तमान में कर्नाटक का हिस्सा हैं. वहीं, कर्नाटक का कहना है कि राज्य पुनर्गठन अधिनियम और 1967 की महाजन आयोग की रिपोर्ट के तहत भाषाई आधार पर किया गया सीमांकन अंतिम है.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.

Read More

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >