Karnataka Politics : बीजेपी-जेडीएस गठबंधन से किसका फायदा? NDA में शामिल हुई JDS

NDA का कुनबा बढ़ता जा रहा है. एच.डी. कुमारस्वामी ने दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से शुक्रवार को मुलाकात की. इसके बाद JDS औपचारिक रूप से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का हिस्सा बन गई.

कर्नाटक की राजनीति से एक बड़ी खबर आ रही है. दरअसल, कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और जेडीएस नेता एच.डी. कुमारस्वामी ने दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से शुक्रवार को मुलाकात की. जेडीएस औपचारिक रूप से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में शामिल हो गई है. बैठक के दौरान बीजेपी अध्यक्ष जे.पी. नड्डा और गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत भी मौजूद रहे.

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर लिखा कि बीजेपी के वरिष्ठ नेता और गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और जेडीएस नेता एचडी कुमारस्वामी से मुलाकात की. मुझे खुशी है कि जेडीएस ने राष्ट्रीय का हिस्सा बनने का फैसला किया है. लोकतांत्रिक गठबंधन… हम एनडीए में उनका तहे दिल से स्वागत करते हैं… उल्लेखनीय है कि कुमारस्वामी 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए कर्नाटक में बीजेपी के साथ अपनी पार्टी के गठबंधन पर चर्चा के लिए बृहस्पतिवार को दिल्ली पहुंचे थे.

पिछले लोकसभा में बीजेपी का कैसा था प्रदर्शन

यहां चर्चा कर दें कि लोकसभा चुनाव को लेकर सभी पार्टियों ने कमर कस ली है. इस बीच बड़ी खबर कर्नाटक से बड़ी खबर सामने आई कि जेडीएस ने एनडीए का दामन थामा है. यदि आपको याद हो तो कुछ दिन पहले कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री येदियुरप्पा ने कहा था कि बीजेपी का 2024 के लोकसभा चुनाव में जनता दल (सेक्युलर) के साथ तालमेल होगा. केन्द्रीय मंत्री अमित शाह जद(एस) को चार लोकसभा सीट देने के लिए सहमत हैं, यह बीजेपी के साथ चुनावी समझौते के तहत हुआ है. यहां चर्चा कर दें कि दक्षिण भारत के एक अहम राज्य कर्नाटक में बीजेपी हर हाल में ज्यादा सीटें लाना चाहती है. पिछली बार राज्य में पार्टी को बड़ी जीत मिली थी. साल 2019 में बीजेपी ने राज्य की 28 लोकसभा सीटों में 25 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि बची तीन सीटों में एक-एक सीट कांग्रेस, जेडीएस और निर्दलीय के खाते में गई थी.

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लगभग 4 सीटें फाइनल

आगामी लोकसभा चुनाव में जेडीएस के साथ गठबंधन पर कर्नाटक के पूर्व सीएम और बीजेपी नेता बीएस येदियुरप्पा ने कहा था कि मुझे खुशी है कि देवेगौड़ा जी ने हमारे प्रधानमंत्री से मुलाकात की और उन्होंने पहले ही लगभग 4 सीटें फाइनल कर ली हैं. मैं उनका स्वागत करता हूं.

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बीजेपी-जेडीएस गठबंधन होने से किसका फायदा ? जानें

इस बार के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने बीजेपी को करारी मात दी है. जब कर्नाटक की बात आती है तो जेडीएस के साथ बीजेपी के रिश्ते को लेकर कई तरह की अटकलें लोग लगाने लगते हैं. राजनीति के जानकारों की मानें तो एक साथ मिलकर लोकसभा चुनाव लड़ने से दोनों पार्टियों को मदद मिलेगी. एक सवाल यह है कि क्या दोनों पार्टियां एक-दूसरे को वोट ट्रांसफर कर सकती हैं? हाल में हुए विधानसभा चुनावों में बीजेपी का वोट शेयर 36 फीसदी और जेडीएस का 14 फीसदी था, लेकिन पिछले लोकसभा चुनाव में अकेले बीजेपी को 52 फीसदी वोट प्राप्त हुए थे.

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गौर हो कि इस साल मई में हुए 224 सदस्यीय कर्नाटक विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 135 सीटों पर जीत मिली, जबकि बीजेपी को 66 और जद (एस) को 19 सीटों पर जीत हासिल हुई.

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Author: Amitabh Kumar

अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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