Janjatiya Gaurav Varsh: औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध प्रतिरोध के प्रतीक के रूप में याद किये जाते हैं भगवान बिरसा मुंडा

भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के अवसर पर मनाए जा रहे जनजातीय गौरव वर्ष का उद्देश्य बिरसा मुंडा और अन्य जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों की प्रेरणादायक विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना है.

Janjatiya gaurav: भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी और औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध प्रतिरोध के प्रतीक के रूप में भगवान बिरसा मुंडा याद किये जाते हैं. उन्होंने अपने जीवन को आदिवासी समाज के उत्थान और स्वराज की भावना को मजबूत करने में समर्पित किया. जनजातीय गौरव पखवाड़ा समारोह के तहत केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को रेल भवन में उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की. 

देशभर में 1 से 15 नवंबर तक मनाया जा रहा ‘जनजातीय गौरव पखवाड़ा’ भारत के महान जनजातीय नायकों की वीरता, त्याग और योगदान को समर्पित है. यह आयोजन भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के अवसर पर मनाए जा रहे जनजातीय गौरव वर्ष का हिस्सा है. इसका उद्देश्य बिरसा मुंडा और अन्य जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों की प्रेरणादायक विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना है. 

 वर्ष 2021 में की थी प्रधानमंत्री ने इसकी घोषणा

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने जनजातीय समाज की संस्कृति, परंपरा और बलिदान को राष्ट्रीय चेतना में स्थान देने के लिए प्रत्येक वर्ष 15 नवंबर को ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के रूप में मनाने की परंपरा शुरू की है.

‘जनजातीय गौरव दिवस’ भारत सरकार द्वारा देश के जनजातीय नायकों की वीरता, बलिदान और योगदान को सम्मानित करने के लिए मनाया जाने वाला एक राष्ट्रीय दिवस है. यह हर साल 15 नवंबर को मनाया जाता है. इसकी घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2021 में की थी, जिसका उद्देश्य देश के आदिवासी समाज के योगदान को राष्ट्रीय पहचान देने के साथ ही युवा पीढ़ी को जनजातीय नायकों की देशभक्ति और स्वाभिमान की भावना से प्रेरित करना है.

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By Anjani Kumar Singh

Anjani Kumar Singh is a contributor at Prabhat Khabar.

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