समलैंगिक विवाह के विरोध में सुप्रीम कोर्ट पहुंचा जमीयत उलेमा-ए-हिंद, पक्षकार बनाने की मांग

जमीयत उलमा-ए-हिंद ने अपनी याचिका में कहा, समलैंगिक विवाह की अवधारणा परिवार व्यवस्था पर हमला करेगी. मुसलमानों में विवाह एक पवित्र अनुबंध है. जो एक जैविक पुरुष और एक जैविक महिला के मिलन की ओर ले जाता है. समलैंगिक विवाह सामाजिक व्यवस्था के लिए बहुत हानिकारक हो सकता है.

समलैंगिक विवाह के विरोध में जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में हस्तक्षेप याचिका दायर की है. जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने इस मामले में पक्षकार बनाने का अनुरोध किया है. मालूम हो इस मामले में सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है.

समलैंगिक विवाह की अवधारणा परिवार व्यवस्था पर हमला

जमीयत उलमा-ए-हिंद ने अपनी याचिका में कहा, समलैंगिक विवाह की अवधारणा परिवार व्यवस्था पर हमला करेगी. मुसलमानों में विवाह एक पवित्र अनुबंध है. जो एक जैविक पुरुष और एक जैविक महिला के मिलन की ओर ले जाता है. समलैंगिक विवाह सामाजिक व्यवस्था के लिए बहुत हानिकारक हो सकता है.

अल्पसंख्यक समूहों ने समलैंगिक विवाह का विरोध किया

कुछ अल्पसंख्यक समूहों ने प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ को पत्र लिखकर समलैंगिक विवाह का विरोध जताने के लिए अपनी धार्मिक मान्यताओं का हवाला दिया है. एक अन्य निकाय ‘कम्युनियन ऑफ चर्च इन इंडिया’ ने भी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को लिखे एक पत्र में इसी तरह के विचार व्यक्त किए हैं.

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केंद्र सरकार ने भी समलैंगिक विवाह का किया विरोध

केंद्र ने भी सुप्रीम कोर्ट में समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने की मांग करने वाली याचिकाओं का विरोध करते हुए कहा है कि यह ‘पर्सनल लॉ’ और स्वीकृत सामाजिक मूल्यों के नाजुक संतुलन को तहस-नहस करने के साथ पूर्ण विनाश का कारण बनेगा.

जैन गुरु ने भी समलैंगिक का विरोध किया

जैन गुरु आचार्य लोकेश ने कहा कि समलैंगिक विवाह को कानूनी मंजूरी भारत के प्राचीन मूल्यों पर आधारित समाज के मूल्यों के खिलाफ होगी. उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में, विशेष रूप से जैनियों के बीच, विवाह वंश के विस्तार के लिए आधार है. पसमांदा (पिछड़े) मुस्लिम समूह के परवेज हनीफ ने भी इन समूहों के समान विचार व्यक्त किए हैं.

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लेखक के बारे में

अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.

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