ISRO का साल का पहला लॉन्च फिर फेल, 64 मिशनों में सिर्फ चार बार ही रहा असफल

ISRO PSLV Launch Failure: ISRO का PSLV-C62 मिशन सोमवार को लॉन्च किया गया था, लेकिन तीसरे स्टेज में खराबी के कारण यह ऑर्बिट तक नहीं पहुंच पाया. EOS-N1 और कई विदेशी सैटेलाइट समेत सोलह सैटेलाइट खो गए. ISRO के चेयरमैन वी नारायणन ने बताया कि डेटा एनालिसिस किया जा रहा है और एक फेलियर एनालिसिस कमेटी विफलता के कारण का पता लगाएगी.

By Govind Jee | January 12, 2026 2:20 PM

ISRO PSLV Launch Failure: 2026 की शुरुआत इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (ISRO) के लिए खास अच्छी नहीं रही. भारत ने PSLV-C62 मिशन के साथ साल का पहला लॉन्च करने की कोशिश की, लेकिन सिर्फ 10 मिनट बाद ही रॉकेट अपने तय रास्ते से भटक गया. सोमवार सुबह लॉन्च होने के 10 मिनट बाद ही रॉकेट ने अपने तय किए गए ऑर्बिट को नहीं मारा और रास्ते से भटक गया. मिशन में 16 सैटेलाइट्स शामिल थीं, जिनमें मुख्य था धरती का ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट EOS-N1. इसके साथ आठ विदेशी सैटेलाइट्स भी थे, जो अब पूरी तरह से खो गए हैं.

PSLV की पहली बार लगातार दो बार विफलता

PSLV रॉकेट, जो ISRO के सबसे भरोसेमंद रॉकेट्स में से एक माना जाता है, अब तक 64 मिशनों में केवल 4 बार ही फेल हुआ था. लेकिन यह पहली बार हुआ कि PSLV ने लगातार दो बार लॉन्च फेल हुआ. पिछले साल मई में PSLV-C61, जो EOS-09 सैटेलाइट लेकर गई थी, तीसरे स्टेज में समस्या के कारण ऑर्बिट तक नहीं पहुच पाया था. (ISRO PSLV Launch Failure in Hindi)

रॉकेट में क्या हुआ- ISRO का बयान

ISRO चेयरपर्सन वी नारायणन ने बताया कि तीसरे स्टेज के अंत में रॉकेट के रोल रेट्स में ज्यादा गड़बड़ी देखने को मिली. इसके बाद फ्लाइट पाथ में डिविएशन देखा गया. उन्होंने कहा कि हम डेटा का विश्लेषण कर रहे हैं और जल्द ही जानकारी देंगे. ISRO ने अपने एक्स पोस्ट पर भी बताया कि PSLV-C62 मिशन को तीसरे स्टेज के अंत में एक अनहोनी का सामना करना पड़ा और इस पर गहन विश्लेषण शुरू कर दिया गया है.

PSLV-C62 मिशन का विवरण

PSLV-C62 चार स्टेज वाला रॉकेट है, जिसमें दो सॉलिड और दो लिक्विड स्टेज शामिल हैं. इसकी ऊंचाई 44.4 मीटर और वजन 260 टन है. लॉन्च सतीश धवन स्पेस सेंटर, श्रीहरिकोटा के पहले लॉन्च पैड से सुबह 10.17 बजे हुआ. मुख्य सैटेलाइट EOS-N1 था, जिसे थाईलैंड और यूके ने मिलकर बनाया था. इसके अलावा नेपाल-भारत टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेशन और स्पेनिश स्टार्टअप का री-एंट्री कैप्सूल भी शामिल था. कुल 16 सैटेलाइट्स थे. ISRO ने बताया कि तीसरे स्टेज के अंत में कोस्टिंग फेज के दौरान तकनीकी गड़बड़ी हुई. यह वह समय होता है जब रॉकेट दो इंजन बर्न्स के बीच अपने पथ पर चलता है. इसी दौरान रॉकेट अपने तय पथ से भटक गया और सभी सैटेलाइट्स खो गए.

पिछले PSLV फेल का कारण

PSLV-C61 के पिछले साल मई में फेल होने की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई थी. लेकिन ISRO चेयरपर्सन वी नारायणन ने कहा कि रॉकेट के प्रेशर चैम्बर में अचानक प्रेशर ड्रॉप हुआ था, जिसके कारण मिशन फेल हुआ. PSLV-C62 की विफलता का कारण अभी स्पष्ट नहीं है और Failure Analysis Committee (FAC) इसे जांच रही है.

मिशन का अन्य उद्देश्य क्या था? 

इस मिशन में सिर्फ धरती के ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट नहीं था. साथ में स्पेनिश स्टार्टअप का KID कैप्सूल भी था, जो एक छोटे पैमाने का री-एंट्री प्रोटोटाइप है. इसे लॉन्च के दो घंटे बाद रॉकेट के चौथे स्टेज PS4 की मदद से डीकॉस्ट किया जाना था और साउथ पैसिफिक में सुरक्षित लैंडिंग करनी थी. PSLV-C62 मिशन ISRO की वाणिज्यिक लॉन्च क्षमता को भी मजबूत करता है. NSIL (NewSpace India Limited) इसे कई घरेलू और विदेशी कस्टमर्स के लिए एक ही मिशन में लॉन्च सर्विस देने के लिए इस्तेमाल करता है. यह मिशन पूरी तरह से ISRO की तकनीकी और व्यावसायिक क्षमताओं को दिखाता है.

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