तमिलनाडु: NDA को झटका, पूर्व मुख्यमंत्री ओपीएस DMK में शामिल, स्टालिन बोले- प्रिय भाई का स्वागत है

तमिलनाडु: राज्य के पूर्व सीएम और एआईएडीएमके के पूर्व नेता विधानसभा चुनाव से पहले डीएमके में शामिल हो गए. उनके इस कदम से भाजपा और एआईडीएमके के गठबंधन वाले एनडीए को बड़ा झटका लगा है. विशेषकर दक्षिणी तमिलनाडु में एनडीए के समर्थक थेवर समुदाय में बड़ी सेध लग सकती है.

तमिलनाडु: एआईएडीएमके से निष्कासित नेता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री ओ. पन्नीरसेल्वम (ओपीएस) शुक्रवार को द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) में शामिल हो गए. इस दौरान चेन्नई में डीएमके पार्टी अध्यक्ष और मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन भी मौजूद रहे. ओपीएस के साथ उनके बेटे पी. रविंद्रनाथ कुमार ने भी आगामी तमिलनाडु विधानसभा चुनावों से पहले डीएमके की सदस्यता ग्रहण की. पन्नीरसेल्वम को 2022 में एडप्पादी के. पलानीस्वामी के साथ नेतृत्व संघर्ष के बाद एआईएडीएमके से निष्कासित कर दिया गया था. ओपीएस का यह कदम आने वाले चुनाव से पहले भाजपा और एआईडीएमके के एनडीए गठबंधन के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है. 

ओपीएस ने डीएमके में शामिल होने के बाद  कहा, ‘यह फैसला मैंने खुद लिया है, ताकि मेरे लिए कड़वे अनुभव पर पूर्ण विराम लग सके. मुझे डीएमके में शामिल करने के लिए मैं मुख्यमंत्री और डीएमके अध्यक्ष स्टालिन का धन्यवाद करता हूं. मैं पूरे आनंद के साथ डीएमके में शामिल हुआ हूं. ईपीएस एक तानाशाह की तरह व्यवहार कर रहे हैं और उन्होंने ऐसी स्थिति बना दी है कि एआईएडीएमके आगे जीत हासिल नहीं कर सकती.’ यह घटनाक्रम पन्नीरसेल्वम द्वारा मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन की सराहना किए जाने और राज्य में डीएमके सरकार की वापसी को लेकर दिए गए उनके बयान के बाद सामने आया है.

स्टालिन ने प्रिय भाई का किया स्वागत

डीएमके अध्यक्ष और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने ओ. पन्नीरसेल्वम का द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) में स्वागत किया. उन्होंने ओपीएस को ‘प्रिय भाई’ कहा और उनकी विनम्रता व सद्गुणों की सराहना की. स्टालिन ने एक्स पर लिखा, ‘पूर्व मुख्यमंत्री और मेरे प्रिय भाई थिरु ओ. पन्नीरसेल्वम मातृ संगठन द्रविड़ मुनेत्र कड़गम में शामिल हो गए हैं. मैं खुले दिल से उनका स्वागत करता हूं. द्रविड़ आंदोलन के महान नेता के नाम को धारण करने वाले पन्नीरसेल्वम हमारे महान आंदोलन की विचारधारा की रक्षा के लिए इस आंदोलन में शामिल हुए हैं.’

स्टालिन ने कहा कि 2026 का विधानसभा चुनाव भाजपा के खिलाफ एक लोकतांत्रिक लड़ाई है और विभिन्न लोकतांत्रिक ताकतें डीएमके गठबंधन से जुड़ रही हैं. उन्होंने ओ. पन्नीरसेल्वम को एक विनम्र और सदाचारी नेता बताया. उन्होंने आगे कहा, ‘2026 का विधानसभा चुनाव तमिलनाडु और फासीवादी भाजपा के बीच एक लोकतांत्रिक संघर्ष है. इसी समझ के साथ विभिन्न लोकतांत्रिक शक्तियां डीएमके गठबंधन से जुड़ रही हैं. हमारे साथ जुड़े हमारे भाई थिरु ओ. पन्नीरसेल्वम स्नेही, सद्गुणी और विनम्र व्यक्ति हैं. उनका आगमन कल्याणकारी हो. तमिलनाडु की विजय हो.’

ओपीएस खेमे के विधायक ने स्टालिन सरकार बनने की उम्मीद जताई

शुक्रवार को ओ. पन्नीरसेल्वम के खेमे के विधायक पी. अय्यप्पन ने भी विधानसभा में इच्छा जताई कि अगले चुनावों के बाद एम. के. स्टालिन एक बार फिर राज्य की कमान संभालें. अय्यप्पन ने विधानसभा में कहा कि एम. के. स्टालिन को दोबारा तमिलनाडु का मुख्यमंत्री बनना चाहिए. उन्होंने कहा, ‘नाश्ता योजना को दूरदर्शी सोच के साथ शुरू किया गया. प्राथमिक स्कूलों में आने वाले छोटे बच्चों के लिए मुख्यमंत्री एक मां की तरह गर्म भोजन उपलब्ध कराते हैं.’ 

उन्होंने आगे कहा, ‘जो लोग कभी यह कहते थे कि मुख्यमंत्री ने केवल 5,000 रुपये दिए हैं, वे आज कहीं नजर नहीं आते. जब तक तमिलनाडु रहेगा, नाश्ता योजना मुख्यमंत्री की प्रशंसा करती रहेगी. आगामी चुनाव में एम. के. स्टालिन को फिर से जीतकर तमिलनाडु का मुख्यमंत्री बनना चाहिए. पुरात्ची थलैवर एम. जी. रामचंद्रन और पुरात्ची थलैवी अम्मा जे. जयललिता के आशीर्वाद से, और हमारे बड़े भाई ओ. पन्नीरसेल्वम की शुभकामनाओं के साथ, मैं इस मौके पर आभार व्यक्त करता हूं.’

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अय्यप्पन की टिप्पणी पर भड़के दिनाकरन

इससे पहले इसी सप्ताह एनडीए सहयोगी और अम्मा मक्कल मुनेत्र कड़गम (एएमएमके) के महासचिव टी. टी. वी. दिनाकरन ने ओपीएस पर पलटवार करते हुए कहा था कि उन्हें गठबंधन चुनने का अधिकार है, लेकिन वे जयललिता का नाम इसमें नहीं घसीट सकते. दिनाकरन ने एम. के. स्टालिन को ‘अम्मा’ और ‘पुरात्ची थलैवर’ के आशीर्वाद से सत्ता में लौटने की बात कहे जाने को अस्वीकार्य बताया. 

उन्होंने कहा, ‘ओ. पन्नीरसेल्वम को व्यक्तिगत तौर पर यह तय करने का पूरा अधिकार है कि वे किस गठबंधन में शामिल होना चाहते हैं या किसके साथ चुनाव लड़ना चाहते हैं. लेकिन विधानसभा में उनके द्वारा दिया गया यह बयान कि डीएमके के स्टालिन, पुरात्ची थलैवर और अम्मा के आशीर्वाद से सत्ता में लौटेंगे, मुझे और जयललिता के किसी भी वफादार समर्थक को स्वीकार्य नहीं है. हम ऐसे बयानों को स्वीकार नहीं करेंगे जो हमारे नेताओं की विरासत और सम्मान को ठेस पहुंचाते हों.’

इसी साल होना है तमिलनाडु में विधान सभा चुनाव

234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा के चुनाव 2026 की पहली छमाही में होने हैं. इन चुनावों में एम. के. स्टालिन के नेतृत्व वाला गठबंधन ‘द्रविड़ियन मॉडल 2.0’ के एजेंडे के साथ भारतीय जनता पार्टी एआईएडीएमके के एनडीए गठबंधन के खिलाफ मैदान में उतरेगा. ओपीएस के डीएमके में शामिल होने से एनडीए को झटका लग सकता है. इस फैसले के चलते एआईएडीएमके के अंदर राजनीतिक संतुलन में बदलाव आया है.

राज्य में एनडीए की स्थिति पर असर पड़ा है और दक्षिण तमिलनाडु के थेवर समुदाय-प्रधान मतदाता क्षेत्रों पर एक बार फिर राजनीतिक फोकस बढ़ गया है. हालांकि, अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कड़गम (टीवीके) के मैदान में उतरने से तमिलनाडु का चुनाव त्रिकोणीय मुकाबले में बदलने की संभावना है.

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2021 के विधानसभा चुनावों में डीएमके ने 133 सीटें जीती थीं. कांग्रेस को 18, पीएमके को पांच, वीसीके को चार और अन्य दलों को आठ सीटें मिली थीं. डीएमके के नेतृत्व वाले धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील गठबंधन (एसपीए) ने कुल 159 सीटें हासिल की थीं. वहीं, एनडीए को 75 सीटें मिली थीं, जिनमें एआईएडीएमके 66 सीटों के साथ गठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी रही थी.

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