India Bloc Meeting: विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ की बैठक में शामिल कई नेताओं ने पुराने गिले-शिकवे भुलाकर एकजुट होने और केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ मिलकर लड़ाई लड़ने पर जोर दिया है. नेताओं का मानना था कि विपक्षी दलों के बीच आपसी विश्वास और बेहतर समन्वय ही बीजेरी को चुनौती देने का सबसे कारगर तरीका है. तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने गठबंधन के घटक दलों से एक-दूसरे पर सार्वजनिक बयान और आलोचना से बचने का आग्रह किया है. बैठक में राहुल गांधी ने कहा कि विपक्षी दलों को बीजेपी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के खिलाफ प्रभावी लड़ाई के लिए एकजुट रहना होगा. उन्होंने नागरिक समाज के आंदोलनों के साथ अधिक जुड़ाव की जरूरत पर जोर दिया और गठबंधन के संगठनात्मक ढांचे को और मजबूत करने की बात कही.
अखिलेश यादव ने कहा- कांग्रेस दिखाए बड़ा दिल
समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि गठबंधन के भीतर किसी तरह की कड़वाहट नहीं होनी चाहिए. उन्होंने सुझाव दिया कि कांग्रेस को बड़ा दिल दिखाते हुए अलग-अलग राज्यों में भाजपा के खिलाफ सबसे मजबूत विपक्षी दल का समर्थन करना चाहिए. उन्होंने पश्चिम बंगाल चुनाव परिणामों पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल हार-जीत के आधार पर नतीजे निकालना उचित नहीं होगा.
2029 की तैयारी का सुझाव
आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने बैठक में कहा कि विपक्ष को केवल मौजूदा चुनावी लड़ाइयों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि 2029 के लोकसभा चुनाव की तैयारी अभी से शुरू करनी चाहिए. उन्होंने भाजपा के खिलाफ लगातार जनसंपर्क और अभियान चलाने की वकालत की.
उद्धव ठाकरे ने नियमित बैठकों का दिया सुझाव
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक में शामिल हुए शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने गठबंधन सहयोगियों के बीच नियमित बैठकों का प्रस्ताव रखा. उन्होंने कहा कि हाल के चुनावों से सबसे बड़ा सबक बेहतर समन्वय की जरूरत है.
बैठक में CJP अभियान पर भी हुई चर्चा
बैठक के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) अभियान का भी जिक्र हुआ. सूत्रों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस पहल के प्रति समर्थन जताते हुए कहा कि यदि कोई अभियान लोगों के बीच लोकप्रिय हो रहा है तो उसके साथ संवाद किया जाना चाहिए. हालांकि, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की नेता सुप्रिया सुले और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने सीजेपी के अचानक उभार और उसकी वैचारिक पृष्ठभूमि को लेकर सवाल उठाए. कांग्रेस नेताओं ने इस मुद्दे पर कोई टिप्पणी नहीं की.
‘इंडिया’ गठबंधन से DMK ने किया किनारा
द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) ने साफ कर दिया है कि वह अब INDIA गठबंधन का हिस्सा नहीं है. पार्टी प्रवक्ता टीकेएस एलंगोवन ने कहा कि तमिलनाडु की बदली राजनीतिक परिस्थितियों और कांग्रेस के साथ मतभेदों के कारण यह निर्णय लिया गया. उन्होंने दावा किया कि कई पार्टियां पहले ही गठबंधन से किनारा कर चुकी हैं, जिसके चलते द्रमुक को भी इसी तरह का रास्ता अपनाना पड़ा. एलंगोवन ने कहा- तमिलनाडु में हमारे तीन सहयोगी दल- कांग्रेस, IUML और VCK अब तमिलगा वेत्री कषगम (YVK सरकार का हिस्सा हैं. इसका मतलब है कि हम (अशख) अब ‘इंडिया’ गठबंधन का हिस्सा नहीं हैं. एलंगोवन ने यह भी कहा कि डीएमके स्वतंत्र रूप से काम करेगी. उन्होंने संकेत दिया कि भविष्य में एक मजबूत धर्मनिरपेक्ष और भाजपा विरोधी गठबंधन आकार ले सकता है.
आम आदमी पार्टी ने भी गठबंधन से बाहर
वहीं, आम आदमी पार्टी ने भी दोहराया कि वह अब ‘इंडिया’ गठबंधन का हिस्सा नहीं है. राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा कि पार्टी कई बार साफ कर चुकी है कि वह गठबंधन से अलग हो चुकी है, इसलिए बैठक में शामिल होने का कोई सवाल नहीं उठता. पार्टी की मुख्य प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ ने भी कांग्रेस के साथ भविष्य में किसी राजनीतिक गठबंधन की संभावना को खारिज कर दिया. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस का प्राथमिक उद्देश्य राष्ट्रीय हितों के बजाय अपने राजनीतिक हितों को साधना रहा है.
केरल मुद्दे पर माकपा और कांग्रेस के बीच दिखी नाराजगी
बैठक में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने केरल विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस नेताओं की ओर से लगाए गए आरोपों पर नाराजगी जताई. पार्टी महासचिव डी. राजा ने भी इस मुद्दे को उठाया और कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन का हिस्सा होने के बावजूद वाम दलों पर लगाए गए आरोप उचित नहीं थे. सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी ने साफ किया कि केरल में उठाए गए मुद्दे राज्य कांग्रेस की चुनावी रणनीति का हिस्सा थे. वहीं, कई अन्य विपक्षी नेताओं ने सुझाव दिया कि अब पुराने विवादों को पीछे छोड़कर भाजपा के खिलाफ साझा संघर्ष पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए.
