Health Ministry:  भारत अब वैश्विक नर्सिंग कार्यबल के सबसे बड़े योगदानकर्ताओं में से एक

भारत ने स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में काफी सुधार किया है. इसी का नतीजा है कि वर्ष 2030 तक दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में नर्सों की कमी में जो कमी आयेगी उसका श्रेय काफी हद तक भारत की नीतिगत पहलों को दिया जायेगा.

Health Ministry:केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और जेएचपीईगो के सहयोग से नर्सिंग शिक्षा और पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के उद्देश्य से तीन दिवसीय ‘राष्ट्रीय परामर्श और अनुभव-साझाकरण कार्यशाला’ का आयोजन किया गया.

इस कार्यशाला का मकसद नीतिगत संवाद को सशक्त बनाना और नर्सिंग व मिडवाइफरी क्षेत्र में सुधारों को गति देना है. कार्यशाला में देशभर से नीति निर्माता, वरिष्ठ अधिकारी, नर्सिंग शिक्षाविद, नियामक संस्थान, पेशेवर संगठन और विभिन्न स्टेकहोल्डर शामिल हुए. इसमें नर्सिंग प्रशासन, शिक्षा और कार्यबल प्रबंधन को सुदृढ़ बनाने के लिए नवीन मॉडलों और सर्वोत्तम प्रथाओं पर चर्चा हुई.

इस परामर्श का उद्देश्य वर्तमान में जारी पहलों की समीक्षा करना, उभरती चुनौतियों की पहचान करना और भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र की प्राथमिकताओं और सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के अनुरूप नर्सिंग प्रशासन, शिक्षा और कार्यबल प्रबंधन को मजबूत करने के लिए नवीन मॉडलों को साझा करना था.

कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों ने नर्सिंग शिक्षा की गुणवत्ता, कार्यबल वितरण, नेतृत्व विकास और करियर उन्नति जैसे मुद्दों पर विचार-विमर्श किया. तीन दिवसीय कार्यक्रम में तकनीकी सत्रों, पैनल चर्चाओं और राज्य-स्तरीय प्रस्तुतियों के माध्यम से “डिजिटल शिक्षा और नर्सिंग नवाचारों” को भी प्रदर्शित किया जा रहा है.

नर्सें और दाइयां भारत की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली का आधार

इस अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव श्रीमती पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने कहा कि नर्सें और दाइयाँ भारत की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली का आधार और सबसे महत्वपूर्ण स्तंभों में से एक हैं. उन्होंने आयुष्मान आरोग्य मंदिर और आशा कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (यूएचसी) प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने को लेकर उनकी सराहना की.

उन्होंने कहा कि इस कार्यशाला के दौरान प्रत्येक राज्य से उभर कर आने वाली सर्वोत्तम प्रथाओं को राष्ट्रीय नीति निर्माण के लिए मार्गदर्शक सुझावों के रूप में कार्य करना चाहिए तथा अन्य राज्यों को देश भर में नर्सिंग क्षेत्र में व्यापक अनुकरण और सुधार के लिए इन मॉडलों पर ध्यान देना चाहिए.

नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य)डॉ. वी. के. पॉल ने कहा कि “भारत की गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा का श्रेय उसके नर्सिंग कार्यबल की प्रतिबद्धता को जाता है. उन्होंने नर्सिंग शिक्षा में गुणवत्ता सुधार, सेवाकालीन प्रशिक्षण और कौशल विकास पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता बताई.

वहीं  भारत में डब्ल्यूएचओ की प्रतिनिधि डॉ. पेडेन ने कहा कि भारत अब वैश्विक नर्सिंग कार्यबल के सबसे बड़े योगदानकर्ताओं में से एक है. उन्होंने बताया कि 2030 तक दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में नर्सों की कमी में जो कमी आएगी, उसका श्रेय काफी हद तक भारत की नीतिगत पहलों को जाएगा. गौरतलब है कि इस परामर्श का उद्देश्य देश में एक सुदृढ़, प्रशिक्षित और सशक्त नर्सिंग कार्यबल का निर्माण करना है, जो भारत की स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ दिशा दे सके.

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Published by: Anjani kumar singh

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