ST-SC आरक्षण में क्रीमी लेयर बनाने के पक्ष में नहीं है सरकार, सुप्रीम कोर्ट में दर्ज याचिका पर दी प्रतिक्रिया

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति श्रेणियों के लिए आरक्षण में क्रीमी लेयर जैसे नियम लागू नहीं किए जा सकते. आरक्षण नीति केवल आर्थिक स्थिति पर आधारित नहीं है, बल्कि सामाजिक पिछड़पन पर भी निर्भर करती है.

ST-SC Reservation Creamy Layer: अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को साल 1990 में आरक्षण दिया गया. इस आरक्षण को आर्थिक आधार पर दिया गया. क्रीमी लेयर और नॉन क्रीमी लेयर की व्यवस्था की गई. लेकिन अनुसूचित जाति (Sc) और जनजाति (St) आरक्षण में इसकी व्यवस्था नहीं है. जिसको लेकर दो महीने पहले इनमें भी आरक्षण में क्रीमी लेयर लागू करने की व्यवस्था करने की याचिका सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई. इस पर सरकार ने प्रतिक्रिया दी है.

अब तक केवल केवल ओबीसी पर लागू होता है क्रीमी लेयर

सरकार ने भारत के सर्वोच्च न्यायालय को बताया कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजति श्रेणियों के लिए आरक्षण में क्रीमी लेयर जैसे नियम को लागू नहीं किए जा सकते. सरकार ने तर्क दिया कि यह सिद्धांत अब तक केवल अन्य पिछड़ा वर्ग पर ही लागू होता आया है.

'आरक्षण निति केवल आर्थिक स्थिति पर निर्धारित नहीं'

आरक्षित श्रेणियों के भीतर आय आधारित उप-कोटा की मांग वाली याचिका का विरोध करते हुए भारत सरकार ने अपनी दलीलें पेश की है. केंद्र ने शीर्ष अदालत को बताया कि आरक्षण निति केवल आर्थिक स्थिति पर निर्धारित नहीं है, बल्कि जनजाति सामाजिक पिछड़पान और ऐतिहासिक, सामाजिक मानदंडों पर आधारित है.

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सरकार ने कहा कि 'बार एंड बेंच' के अनुसार कोई भी संशोधन, विशेष रूप से आरक्षित श्रेणियों में आय-आधारित वरीयता को लागू करने के लिए आरक्षित श्रेणी के लाभार्थियों के सामाजिक-आर्थिक आंकड़ों सहित समग्र समीक्षा और गहन अध्ययन की जरूरत है.

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सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने 15 जून 2026 को दिए गए एक जवाब में कहा था कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति श्रेणियों में क्रीमी लेयर सिद्धांत को विस्तारित करने के प्रश्न पर केवल संसद ही निर्णय ले सकती है. हलफनामे में अदालत से यह भी अपील की गई कि वह उन याचिकाओं पर विचार करने से परहेज करें, जिनमें देश की आरक्षण नीति को फिर से तैयार करने के लिए न्यायिक निर्देश मांगे गए हों.


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By दीपक कुमार गुप्ता

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दीपक कुमार गुप्ता ने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पत्रकारिता की पढ़ाई की है और वर्ष 2021 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. इससे पहले वह करीब ढाई साल तक ETV Bharat के साथ काम कर चुके हैं. पत्रकारिता के दौरान उन्होंने न्यूज प्लस, अंतर्कथा विजन न्यूज और पब्लिक ऐप जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के साथ भी काम किया है.

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