मेटा को सरकार ने भेजा नोटिस-बच्चों के यौन शोषण वाले विज्ञापन इंस्टाग्राम से हटाएं

Meta : इंस्टाग्राम के पेड विज्ञापनों के जरिये बच्चों के यौन शोषण को बढ़ावा देने वाले कंटेंट पर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है और मेटा कंपनी को अविलंब ऐसे कंटेंट हटाने के आदेश जारी किए हैं.

Meta : सरकार ने इंस्टाग्राम विज्ञापनों में बच्चों के यौन शोषण वाली सामग्री पर मेटा को कड़ा नोटिस जारी किया है. न्यूज एजेंसी पीटीआई ने यह जानकारी सूत्रों के हवाले से रविवार को दी. सरकार ने मेटा से यह कहा है कि वे बच्चों के यौन शोषण को बढ़ावा देने वाले कंटेंट को इंस्टाग्राम ऐड से हटाएं

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने जारी किया नोटिस

मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (MeitY) ने इंस्टाग्राम को वह सारा कंटेंट हटाने का आदेश दिया जो बच्चों के यौन शोषण और शोषण तक पहुंच को आसान बनाते हैं. सूत्रों ने बताया है कि इंस्टाग्राम पर पेड विज्ञापनों में बच्चों के यौन शोषण और गलत व्यवहार से जुड़े कंटेंट को लेकर मेटा को नोटिस शनिवार को भेजा गया है.

7 दिनों के अंदर मांगा गया है जवाब

मंत्रालय ने मेटा से सात दिनों के अंदर इस संबंध में जवाब मांगा है. जानकारी न देने पर इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट और प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस (POCSO) एक्ट के तहत कानूनी कार्रवाई हो सकती है.हाल ही में सरकार ने टेलीग्राम को भी नोटिस जारी किया था और उन्हें पायरेटेड फिल्में और OTT कंटेंट की अवैध शेयरिंग रोकने का निर्देश दिया है.

ये भी पढ़ें : 15 दिन में जवाब दो! पायरेसी रोकने के लिए Telegram को सरकार का आदेश

मुंबई में बारिश का कहर, IMD का रेड अलर्ट; जलभराव से सड़क यातायात और विमान सेवाएं प्रभावित

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >