Instagram, Reels और Delulu...Gen Z के लिए BJP बदल रही है अपनी रणनीति ! जानिए क्यों

संसद में Gen Z स्लैंग से लेकर Instagram Reels और Influencer आउटरीच तक, BJP युवाओं तक पहुंचने के लिए अपनी कम्युनिकेशन रणनीति बदलती नजर आ रही है. आखिर क्या है इस बदलाव की वजह और क्यों Gen Z अब हर राजनीतिक दल के लिए सबसे बड़ा चुनावी फैक्टर बन गया है?

FOMO, Delulu, Clock It…ये शब्द अब सिर्फ Instagram Reels या सोशल मीडिया की दुनिया तक सीमित नहीं रहे, बल्कि अब संसद की बहस में भी सुनाई देने लगे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंस्टाग्राम पर बढ़ती सक्रियता भी साफ संकेत देती है कि राजनीति का संवाद अब तेजी से डिजिटल प्लेटफॉर्म की ओर शिफ्ट हो रहा है.

ऐसे में यह सवाल लाजमी है कि क्या राजनेता अब नई पीढ़ी से जुड़ने के लिए उनकी भाषा बोल रहे हैं, या फिर यह सिर्फ बदलते दौर के साथ तैयार की गई उनकी नई रणनीति है?

संसद में दिखा भाजपा का Gen Z टच

पेपर लीक कानून पर चर्चा के दौरान BJP सांसद तेजस्वी सूर्या, बांसुरी स्वराज और श्रीकांत शिंदे ने अपने भाषणों में FOMO, MIA, Delulu और Clock It जैसे Gen Z स्लैंग का इस्तेमाल किया, राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इसके जरिए पार्टी यह संदेश देना चाहती है कि वह नई पीढ़ी की भाषा और डिजिटल कल्चर को समझती है.

ये भी पढ़ें :सड़क पर Gen Z का जलवा, लेकिन संसद में कितनी बुलंद है नई पीढ़ी की आवाज?

BJP का Gen Z गेम प्लान, युवाओं तक पहुंचने के लिए नई स्ट्रैटेजी

भारतीय जनता पार्टी (BJP) अब Gen Z से कनेक्ट करने के लिए अपनी कम्युनिकेशन स्टाइल में बदलाव कर रही है. पार्टी डिजिटल प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया ट्रेंड्स और ऑन-ग्राउंड इवेंट्स के जरिए नई पीढ़ी तक पहुंच बनाने की कोशिश में जुटी है.जिसके लिए कई प्रयास किए जा रहे.

पीएम मोदी भी मिशन का हिस्सा

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी BJP की इस नई Gen Z रणनीति में अहम भूमिका निभा रहे हैं हाल के दिनों में उन्होंने Instagram पर अपनी सक्रियता बढ़ाई है. उन्होंने कई Reels और वीडियो शेयर किए, छात्रों से संवाद किया, पेपर लीक जैसे मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया दी और हालिया विरोध प्रदर्शनों को लेकर भी अपनी बात रखी.

संसद में Gen Z स्लैंग की एंट्री

मानसून सत्र में भाजपा के कुछ युवा सांसद संसद में अपने भाषणों के दौरान FOMO, MIA, Delulu और Clock It जैसे Gen Z स्लैंग का इस्तेमाल करते नजर आए.

Instagram और Reels पर फुल फोकस

पार्टी नेताओं के हालिया कदमों से संकेत मिलता है कि BJP Instagram पर अपनी मौजूदगी और मजबूत कर रही है. Reels, शॉर्ट वीडियो, ट्रेंडिंग ऑडियो और वायरल कंटेंट के जरिए युवाओं तक पहुंचने की रणनीति पर काम किया जा रहा है. नेताओं और मंत्रियों को भी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ज्यादा एक्टिव रहने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है.

ऑन-ग्राउंड कनेक्शन की तैयारी

सिर्फ ऑनलाइन ही नहीं, बल्कि रैलियों, युवा सम्मेलनों, कॉलेज इंटरैक्शन और पब्लिक प्रोग्राम के जरिए भी Gen Z से कनेक्ट करने की तैयारी है. पार्टी की कोशिश है कि पहली बार वोट देने वाले युवा मतदाताओं के साथ मजबूत संवाद बनाया जाए.

त्योहार भी बनेंगे आउटरीच का जरिया

मीडिया रिपोर्ट्स में दावा है कि आने वाले दिनों में तिरंगा यात्रा, जन्माष्टमी, गणेश चतुर्थी और नवरात्रि जैसे बड़े आयोजनों में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने पर भी फोकस रहेगा. इन कार्यक्रमों के जरिए Gen Z को जोड़ने की रणनीति तैयार की जा रही है.

Cringe या Smart Move

सोशल मीडिया पर BJP की Gen Z आउटरीच को लेकर बहस भी छिड़ी हुई है। कई यूजर्स ने पार्टी के नए डिजिटल अंदाज को Cringe  बताया। इंटरनेट कल्चर में Cringe का मतलब ऐसी चीज से है, जो जरूरत से ज्यादा बनावटी या असहज लगे. हालांकि, पार्टी का दावा है कि उसकी नई डिजिटल रणनीति युवाओं तक पहुंच बनाने में असर दिखा रही है.

अब Influencers होंगे गेम चेंजर

BJP आने वाले समय में सोशल मीडिया Influencers और Content Creators के साथ बड़े स्तर पर काम करने की तैयारी में है. बताया जा रहा है कि पार्टी बड़े Influencer Events आयोजित कर सकती है, Gen Z Creators को अपने कार्यक्रमों से जोड़ सकती है और संसद सत्र के बाद युवाओं पर फोकस करने के लिए एक अलग Outreach Cell भी बना सकती है.

RSS भी मिशन Gen Z में एक्टिव

RSS भी युवाओं तक पहुंच बढ़ाने की कवायद में जुटा है. हाल ही में RSS प्रमुख मोहन भागवत ने मुंबई में Gen Z और Gen Alpha के छात्रों के साथ एक विशेष कार्यक्रम में हिस्सा लिया.जिसमें करीब 2,000 छात्रों और 100 से ज्यादा शहरों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी बताई गई है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि RSS भी युवाओं के बीच वैचारिक संवाद बढ़ाने की कोशिश कर रहा है.

यानी सोशल मीडिया ट्रेंड्स, युवाओं की भाषा और बड़े सार्वजनिक आयोजनों के जरिए BJP नई पीढ़ी के साथ अपनी पहुंच मजबूत करने की कोशिश कर रही है.

ये भी पढ़ें : विवादों में क्यों रहती हैं JPSC की भर्ती परीक्षाएं? जानिए 2003 से 2026 तक कब क्या लगे आरोप

राजनीतिक पार्टियों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है Gen Z?

भारत की राजनीति में Gen Z सिर्फ सोशल मीडिया ट्रेंड नहीं, बल्कि सबसे बड़ा चुनावी फैक्टर बनता जा रहा है. मौजूदा समय में देश में 18 से 29 वर्ष आयु वर्ग के करीब 30 से 31 करोड़ Gen Z वोटर हैं.यह देश के कुल वोटर्स का लगभग 29.2% है. जिसका मतलब हुआ लगभग हर तीसरा मतदाता Gen Z हैं.

तो क्या आने वाले दिनों डिजिटल हो जाएगी राजनीति की भाषा

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, Gen Z पारंपरिक राजनीतिक सोच से अलग मानी जाती है। यह पीढ़ी किसी एक विचारधारा से स्थायी रूप से जुड़ी नहीं रहती, बल्कि सोशल मीडिया, Reels, Shorts, Podcasts और डिजिटल कंटेंट के जरिए अपनी राय बनाती है. जिसका उदाहरण हमने दिल्ली के जंतर मंतर पर आंदोलन के दौरान देखा है.

इसलिए बदल रही राजनीतिक दलों की स्ट्रैटेजी

यही वजह है कि आज लगभग सभी राजनीतिक दल Instagram, YouTube और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपनी मौजूदगी बढ़ाने में लगे हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लगभग हर तीसरा वोटर Gen Z होने के कारण अब किसी भी दल के लिए इस वर्ग को नजरअंदाज करना आसान नहीं है.

यही वजह है कि सोशल मीडिया कैंपेन, इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग, डिजिटल आउटरीच और युवाओं की भाषा में संवाद आज चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा बनते जा रहे हैं. हालांकि विश्लेषकों का यह मानना भी है कि केवल सोशल मीडिया की भाषा अपनाने से ही युवाओं का समर्थन नहीं मिलता. रोजगार, शिक्षा, परीक्षा व्यवस्था, स्टार्टअप, डिजिटल अवसर और आर्थिक नीतियां जैसे मुद्दे भी युवाओं के लिए उतने ही महत्वपूर्ण हैं.

पढ़िए देश दुनिया और बिहार झारखंड की ओरिजिनल खबर


प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By गौतम कुमार

गौतम कुमार वर्तमान में प्रभात खबर से जुड़े पत्रकार और लेखक हैं. वे राजनीति, इतिहास, साहित्य, खेल, कानून, लोक संस्कृति और मनोरंजन जैसे विविध विषयों पर लिखते हैं. इसके साथ-साथ  ट्रेंडिंग, यूटिलिटी और वायरल हो रहे जरूरी विषयों पर भी लेखन करते हैं. रिपोर्टिंग या लेखन के दौरान उनका जोर केवल घटनाओं की जानकारी देने पर नहीं, बल्कि उसके पीछे की पृष्ठभूमि, सामाजिक-सांस्कृतिक संदर्भ और उसके प्रभाव को समझाने पर रहता है.

अपने पत्रकारिता करियर में गौतम कुमार ने RealisticMedia और दैनिक भास्कर जैसे मीडिया संस्थानों के साथ मिलकर 2 साल से अधिक समय तक काम किया है. पत्रकारिता के अलावा उन्हें डिजिटल कंटेंट लेखन, वीडियो स्क्रिप्टिंग और डिजिटल प्रोडक्शन का अनुभव है.

किताबों, फिल्मों और कहानियों में उनकी विशेष रुचि है. वे मानते हैं कि अच्छी किताब या अच्छी फिल्म मिलने के बाद बाकी दुनिया कुछ देर इंतजार कर सकती है. यही रुचि उनके लेखन में भी दिखाई देती है, जहां वे खबर और घटनाओं के पीछे छिपी कहानी को समझने और पाठकों के सामने उसे सरल और संदर्भपूर्ण तरीके से रखने की कोशिश करते हैं.

गौतम मानते हैं कि किसी विषय पर लोगों की राय और उनका विचार अलग हो सकता है, संभव है नजरिया भी अलग हो, लेकिन सार्थक संवाद की शुरुआत इन्हीं अलग-अलग दृष्टिकोणों को समझने से होती है. इसलिए पाठक अपनी राय, सुझाव और विचार रखने के लिए उनसे सोशल मीडिया के माध्यम से जुड़ सकते हैं.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >