Dr Ravi Rana: भारत आज विश्व की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शुमार है, लेकिन इस विकास की चमक के पीछे एक गहरा संकट भी आकार ले रहा है. मेरठ स्थित माही माइंड सेंटर के प्रसिद्ध मनोचिकित्सक डॉ. रवि राणा ने आगाह किया है कि मानसिक स्वास्थ्य का बढ़ता बोझ देश के लिए एक ‘छुपी हुई महामारी’ बन चुका है, जिसे अब और नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
हर सातवें भारतीय पर मानसिक बीमारी का साया
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों का हवाला देते हुए डॉ. राणा ने बताया कि भारत में हर 7 में से 1 व्यक्ति किसी न किसी मानसिक विकार से जूझ रहा है. शहरीकरण की अंधी दौड़, कड़ी प्रतिस्पर्धा, डिजिटल जीवनशैली और सामाजिक अलगाव ने डिप्रेशन, एंग्जायटी और नशे की लत जैसी समस्याओं को घर-घर पहुँचा दिया है.
डॉ. राणा के अनुसार, सबसे बड़ी चुनौती आज भी समाज में व्याप्त ‘कलंक’ (Stigma) है. लोग अपनी मानसिक स्थिति पर चर्चा करने में झिझकते हैं, जिससे वे समय पर विशेषज्ञ की सहायता नहीं ले पाते.
शारीरिक बीमारियों की जड़ में मानसिक तनाव
लेख में इस बात पर विशेष ज़ोर दिया गया है कि मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य एक-दूसरे के पूरक हैं. डॉ. राणा ने स्पष्ट किया कि लंबे समय तक बना रहने वाला तनाव शरीर में हार्मोनल असंतुलन पैदा करता है, जो आगे चलकर निम्नलिखित बीमारियों का कारण बनता है.
- हृदय रोग और उच्च रक्तचाप (High BP)
- मधुमेह (Diabetes)
- पाचन तंत्र की विकृतियां
- अनिद्रा (Insomnia)
उन्होंने यह भी बताया कि अवसाद के कारण प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) कम हो जाती है, जिससे व्यक्ति बार-बार अन्य बीमारियों की चपेट में आने लगता है.
समाधान की राह: ‘डिजिटल डिटॉक्स’ और जागरूकता
इस संकट से निपटने के लिए डॉ. राणा ने एक बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाने का सुझाव दिया है.
- जागरूकता: स्कूलों और कार्यस्थलों पर मानसिक स्वास्थ्य को चर्चा का मुख्य विषय बनाना होगा.
- जीवनशैली में बदलाव: नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और ‘डिजिटल डिटॉक्स’ (सोशल मीडिया से दूरी) मानसिक शांति के लिए अनिवार्य हैं.
- समय पर परामर्श: लक्षणों को नजरअंदाज न करें और समय रहते मनोचिकित्सक से सलाह लें.
डॉ. रवि राणा का संदेश
“मानसिक स्वास्थ्य कोई विकल्प या लग्जरी नहीं, बल्कि एक बुनियादी जरूरत है. आज समय की मांग है कि हम मानसिक पीड़ा को भी उतनी ही गंभीरता से लें, जितनी हम किसी शारीरिक घाव या बीमारी को देते हैं.”
