भारत को इग्नोर करना अमेरिका को पड़ने लगा भारी, ट्रंप की नरमी पर आई एक्सपर्ट की राय

Donald Trump And PM Modi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जापान और चीन दौरे से लौटने के बाद अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सुर बदलने लगे हैं. चीन में रूसी राष्ट्रपति और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को एक ही फ्रेम में देखकर ट्रंप घबरा गए थे. SCO मीटिंग के बाद ट्रंप ने भारत को लेकर शख्त टिप्पणी की थी. लेकिन अब उनके तेवर में नरमी दिखने लगी है. उन्होंने प्रधानमंत्री को अपना दोस्त बताया है और भारत-अमेरिकी रिश्ते पर भी बड़ा बयान दे दिया है. ट्रंप के बयान के बाद पूर्व राजदूत की प्रतिक्रिया आई है.

Donald Trump And PM Modi: डोनाल्ड ट्रंप के पीएम मोदी को दोस्त बताने पर फ्रांस और मोनाको में भारत के पूर्व राजदूत जावेद अशरफ ने अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा- “मैं यही कहना चाह रहा हूं कि अभी शुरुआती दिन हैं. हमें अभी भी इंतजार करना होगा और देखना होगा. लेकिन हमने इस बयान और पिछले कुछ दिनों में दिए गए कुछ बयानों में देखा है कि तनाव में निश्चित रूप से कमी आ रही है. हम इसे एक सकारात्मक संकेत मानते हैं. लेकिन हम अभी भी इस तथ्य से अवगत हैं कि भारतीय उत्पादों पर अभी भी 50% टैरिफ दर लागू है. ये चीजें उस स्तर पर पहुंच गई थीं जहां से हम इसे फिर से बनाने की कोशिश कर रहे हैं. अमेरिका में जिन लोगों का भारत के साथ लंबे समय से लेन-देन का इतिहास रहा है, उन्हें हमेशा याद रखना चाहिए कि भारत ने हमेशा भारत और पाकिस्तान के बीच किसी भी रिश्ते या किसी भी मुद्दे में तीसरे पक्ष की मध्यस्थता या भूमिका को अस्वीकार किया है.”

अमेरिकी दबाव में भारत अपने मूल हितों से समझौता नहीं करने वाला : पूर्व राजदूत जावेद अशरफ

भारत के पूर्व राजदूत जावेद अशरफ ने कहा, “मुझे लगता है कि यह एक बहुत ही स्वागत योग्य कदम है… प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति ट्रंप की बातों का बहुत ही संयमित लेकिन सकारात्मक तरीके से सही ढंग से जवाब दिया है. यह इस बात का संकेत है कि हमारे बीच कोई मतभेद नहीं है. इसे सुलझाना वास्तव में अमेरिका का काम है. भारत लगातार अमेरिकी दबाव में अपने मूल हितों से समझौता नहीं करने वाला है या वह अमेरिकी मांगों के आगे इस तरह झुकने या झुकने वाला नहीं है जिससे हमारे राष्ट्रीय हितों से समझौता हो.”

बहुत ही स्वागत योग्य कदम है : भारतीय राजदूत

भारतीय राजदूत ने ट्रंप के बयान पर कहा- “मुझे लगता है कि यह एक बहुत ही स्वागत योग्य कदम है… इसके अलावा, पिछले कुछ समय से, जैसा कि आप जानते हैं, भारत-पाकिस्तान संघर्ष की समाप्ति या इसका श्रेय लेने का जिक्र गायब रहा है. मुख्य रूप से भारत द्वारा रूस से तेल खरीद को ही मतभेद का स्रोत बताया गया है. इसलिए मुझे लगता है कि आज धीरे-धीरे रुख में नरमी आई है. हमने कुछ सकारात्मक देखा है. और मुझे लगता है कि हमें अभी भी इसके बारे में आशावादी रहना चाहिए क्योंकि यह पहला कदम है. एक, राष्ट्रपति ट्रंप अक्सर अपने विचार बदलते रहते हैं और वह भी सोशल मीडिया पर. इसलिए मुझे लगता है कि हमें इस बात का ध्यान रखना होगा. यह एक कदम आगे है. दूसरा, हमें अभी भी यह स्वीकार करना होगा कि इस समय भी टैरिफ लागू हैं और इसे ध्यान में रखना होगा क्योंकि असली परीक्षा तब होगी जब हम इस बेहद गंभीर मुद्दे से निपटेंगे.

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लेखक के बारे में

अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.

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