कर्नाटक में मंत्री पद के विवाद पर बोले डीके शिवकुमार-रामलिंगा मेरे दोस्त हैं, सबकुछ सुलझ गया है

DK Shivakumar : कर्नाटक में मंत्रियों के विभागों को लेकर जो विवाद शुरू हुआ था, उसपर प्रदेश के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार का कहना है कि सबकुछ ठीक है, रामलिंगा मेरे दोस्त हैं और सबकुछ सुलझ गया है. हालांकि 5 जून को रामलिंगा रेड्डी ने कहा था कि वे अब मानने वाले नहीं हैं, क्योंकि वो कितना अपमान सहन कर सकते हैं.

DK Shivakumar : कर्नाटक कैबिनेट के मंत्री रामलिंगा रेड्डी के इस्तीफे पर एक बार फिर मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा है रेड्डी मेरे दोस्त हैं. जो भी समस्या थी वह सुलझ गई है. उन्होंने मीडिया से कहा कि आप कहानियां ना बनाएं. सारी कहानियां पुरानी हो गई हैं. इस्तीफे का मामला सुलझ गया है.

प्रधानमंत्री मोदी को कहा थैंक यू

मीडिया से बात करते हुए डीके शिवकुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुझे विश किया. मैं उन्हें थैंक यू कहना चाहता हूं. मुझे उनसे शिष्टाचार के तौर पर मिलना भी है. हम सिर्फ पॉलिटिक्स के लिए पॉलिटिक्स नहीं चाहते. आइए हम सब मिलकर ऐसी पॉलिटिक्स करें जिससे राज्य के लोगों को फायदा हो. डीके शिवकुमार ने 3 जून को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है, उसके बाद उन्हें पीएम मोदी ने बधाई दी है.

रामलिंगा रेड्डी ने 5 जून को इस्तीफा दिया

डीके शिवकुमार ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद 4 जून को मंत्रियों के विभागों की घोषणा की. विभागों की घोषणा के बाद रामलिंगा रेड्डी ने 5 जून को प्रेस काॅन्फ्रेंस कर अपना इस्तीफा सौंप दिया. उन्होंने कहा कि मुझे बेंगलुरु विकास विभाग चाहिए था, लेकिन शिवकुमार ने उन्हें बड़ी और मध्यम सिंचाई परियोजनाओं का विभाग सौंप दिया. रेड्डी ने कहा कि मैं अपने पद से इस्तीफा दे रहा हूं क्योंकि मैं अपनी अंतरात्मा के विरुद्ध जाकर काम नहीं कर सकता. उन्होंने कहा कि मैं इस अपमान को सहन नहीं कर सकता हूं, इस्तीफे के अलावा मेरे पास कोई विकल्प नहीं है. उन्होंने यह भी कहा था कि अगर उन्हें पसंद का विभाग सौंप भी दिया जाता है तो वे अपना फैसला नहीं बदलेंगे.

ये भी पढ़ें : कॉकरोच जनता पार्टी का जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी, सोनम वांगचुक भी होंगे शामिल; शिक्षा मंत्री से इस्तीफे की मांग

कौन हैं अन्नामलाई जिनके बीजेपी छोड़ने पर मचा हड़कंप? तमिलनाडु की राजनीति में आ सकता है नया मोड़

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >