कर्नाटक की राजनीति में आज से नई शुरुआत, डीके शिवकुमार लेंगे सीएम पद की शपथ

DK Shivakumar Karnataka CM Oath: कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री के रूप में डीके शिवकुमार आज शपथ लेंगे. शपथ ग्रहण से पहले उनके गृह क्षेत्र कनकपुरा में उत्सव जैसा माहौल है. कांग्रेस नेतृत्व ने नए मंत्रिमंडल और संगठनात्मक बदलावों पर भी मंथन किया है.

DK Shivakumar Karnataka CM Oath: कर्नाटक की राजनीति में लंबे समय से चल रही नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच गई है. कांग्रेस विधायक दल के नेता चुने जाने के बाद डीके शिवकुमार बुधवार को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं. बंगलुरु के लोक भवन में बुधवार शाम 4 बजे डीके शिवकुमार कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे. उनके शपथ ग्रहण से पहले उनके गृह क्षेत्र कनकपुरा में समर्थकों के बीच उत्साह साफ दिखाई दे रहा है.

कर्नाटक में मुख्यमंत्री घोषित- शिवकुमार के शपथ ग्रहण समारोह से पहले कनकपुरा में जश्न का माहौल है. डीके शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने पर बधाई देने वाले पोस्टर, बैनर और बड़े-बड़े कटआउट उनके आवास के आसपास और पूरे विधानसभा क्षेत्र में लगाए गए हैं.

मंत्रिमंडल की सूची पर कांग्रेस हाईकमान का फैसला

शपथ ग्रहण से पहले मंगलवार को डीके शिवकुमार ने कहा था कि नए मंत्रिमंडल की अंतिम सूची कांग्रेस हाईकमान की ओर से जारी की जाएगी. उन्होंने मीडिया में चल रही संभावित मंत्रियों की सूची को लेकर कहा कि जो नाम सामने आ रहे हैं, वे आधिकारिक नहीं हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस नेतृत्व तय समय पर मंत्रियों के नामों की घोषणा करेगा.

शपथ के बाद बैठकों का दौर

डीके शिवकुमार ने यह भी जानकारी दी कि कांग्रेस भवन के शिलान्यास कार्यक्रम को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है. उन्होंने बताया कि शपथ ग्रहण के बाद पार्टी पदाधिकारियों के साथ बैठकें होंगी और इसके बाद मंत्रिमंडल की पहली बैठक भी आयोजित की जाएगी.

छात्र राजनीति से मुख्यमंत्री पद तक का सफर

15 मई 1962 को कनकपुरा में जन्मे डोड्डालहल्ली केम्पेगौड़ा शिवकुमार, जिन्हें आमतौर पर डीके शिवकुमार के नाम से जाना जाता है, ने 1980 के दशक में छात्र राजनीति से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी. 1985 में उन्हें चुनावी हार का सामना करना पड़ा, लेकिन 1989 में मात्र 27 वर्ष की उम्र में उन्होंने पहली बार विधानसभा चुनाव जीता. इसके बाद उन्होंने लगातार आठ बार विधानसभा चुनाव जीतकर अपनी मजबूत राजनीतिक पकड़ साबित की.

कांग्रेस के ‘ट्रबलशूटर’ के रूप में बनाई पहचान

कांग्रेस संगठन में डीके शिवकुमार को अक्सर संकटमोचक या ‘ट्रबलशूटर’ के रूप में देखा जाता है. उन्होंने कई राजनीतिक संकटों के दौरान पार्टी के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. 2002 के कांग्रेस-एनसीपी  महाराष्ट्र राजनीतिक संकट के दौरान तत्कालीन शहरी विकास मंत्री शिवकुमार ने अपनी पार्टी के विधायकों को हॉर्स ट्रेडिंग से बचाया था.

वहीं, 2017 के गुजरात राज्यसभा चुनावों के दौरान कांग्रेस की रणनीति को संभालने में भी उनकी भूमिका चर्चा  में रही. कर्नाटक में 2023 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के पीछे भी उन्हें प्रमुख रणनीतिकारों में गिना जाता है. राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ को भी सफल बनाने में डीके शिवकुमार का बड़ा हाथ माना जाता है.

गांधी परिवार के करीबी नेताओं में गिने जाते हैं

डीके शिवकुमार को कांग्रेस की शीर्ष नेतृत्व टीम का भरोसेमंद चेहरा माना जाता है. उनकी नजदीकी सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और मल्लिकार्जुन खरगे जैसे नेताओं के साथ रही है. यही वजह रही कि लंबे आंतरिक मंथन के बाद मुख्यमंत्री पद के लिए उनकी दावेदारी मजबूत हुई.

विवादों के बावजूद नहीं रुका राजनीतिक सफर

अपने लंबे राजनीतिक करियर के दौरान डीके शिवकुमार कई जांचों और विवादों से भी जुड़े रहे. वर्ष 2019 में उन्हें कुछ समय के लिए जेल भी जाना पड़ा था. हालांकि इन घटनाओं का उनके राजनीतिक प्रभाव पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा और वे लगातार संगठन तथा सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाते रहे. 2020 से कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के रूप में काम कर रहे शिवकुमार पिछली सरकार में उपमुख्यमंत्री भी रह चुके हैं.

कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन का महत्वपूर्ण पड़ाव

मुख्यमंत्री पद की शपथ के साथ डीके शिवकुमार औपचारिक रूप से राज्य की कमान संभाल लेंगे. कांग्रेस संगठन को मजबूत करने, चुनावी रणनीति बनाने और कई राजनीतिक संकटों से पार्टी को निकालने वाले नेता के रूप में उनकी पहचान रही है. ऐसे में उनका मुख्यमंत्री बनना कर्नाटक की राजनीति में एक महत्वपूर्ण नेतृत्व परिवर्तन माना जा रहा है.

सिद्धरमैया के इस्तीफे से शुरू हुई थी प्रक्रिया

कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की शुरुआत 28 मई को हुई थी, जब तत्कालीन मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद राज्यपाल ने उनका इस्तीफा स्वीकार करते हुए मंत्रिपरिषद को भंग कर दिया था. इसी के साथ राज्य में नए नेतृत्व को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई थीं. 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2023 में कर्नाटक विधान सभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद पार्टी ने 2.5-2.5 साल के मुख्यमंत्री पद का वादा किया था. इसमें पहले सिद्धरमैया और फिर शिवकुमार को मौका मिलना था. हालांकि, सिद्धरमैया ने 2.5 साल से ज्यादा समय तक मुख्यमंत्री पद अपने पास रखा. कांग्रेस हाईकमान का आदेश मिलने के बाद ही उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दिया है.

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कांग्रेस कार्यसमिति में सिद्धरमैया की एंट्री

कांग्रेस नेतृत्व ने सिद्धरमैया को तत्काल प्रभाव से कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) का सदस्य नियुक्त कर दिया. अहिंदा की राजनीति करने वाले सिद्धरमैया को पार्टी संगठन में उनके अनुभव और भूमिका को देखते हुए महत्वपूर्ण फैसला माना जा रहा है.

दिल्ली में हुई अहम बैठक

मंगलवार को नई दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, डीके शिवकुमार और सिद्धारमैया के बीच महत्वपूर्ण बैठक हुई. इस बैठक में नए मंत्रिमंडल के गठन, राज्यसभा नामांकन और संगठन में संभावित बदलावों को लेकर विस्तार से चर्चा की गई. रिपोर्ट्स के मुताबिक अब भी कर्नाटक कांग्रेस के इन दो दिग्गज नेताओं के बीच अपने नेताओं को अहम पद दिलाने की कोशिश की जा रही है. हालांकि, अब इसमें ज्यादा समय नहीं है. आज, बुधवार, शाम 4 बजे डीके शिवकुमार के मुख्यमंत्री शपथ लेने के बाद कैबिनेट विस्तार के बारे में स्थिति और साफ होगी.

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