Farmers Protest: किसान आंदोलन के कारण पंजाब में हो सकती है डीजल और गैस की किल्लत

किसानों के दिल्ली चलो विरोध मार्च में शामिल प्रदर्शनकारियों ने मंगलवार को अंबाला में शंभू बॉर्डर पर लगाए गए बैरिकेड को तोड़ने की कोशिश की, जिसके बाद भीड़ को तितर-बितर करने के लिए हरियाणा पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े.

किसान आंदोलन के कारण दिल्ली में जहां ट्रैफिक जाम की स्थिति उत्पन्न हो गई है, वहीं पंजाब में डीजल और गैस की भारी किल्लत होने की संभावना बढ़ गई है. न्यूज एजेंसी एएनआई के अनुसार किसान आंदोलन के कारण पंजाब में पचास फीसदी कम डीजल और बीस फीसदी कम गैस भेजी जा सकी.

किसानों ने बेरिकेड हटाने का किया प्रयास, पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े

किसानों के दिल्ली चलो विरोध मार्च में शामिल प्रदर्शनकारियों ने मंगलवार को अंबाला में शंभू बॉर्डर पर लगाए गए बैरिकेड को तोड़ने की कोशिश की, जिसके बाद भीड़ को तितर-बितर करने के लिए हरियाणा पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े. शंभू सीमा के पास उस समय अव्यवस्था की स्थिति बन गई, जब किसानों ने सीमेंट से बने अवरोधक हटाने के लिए ट्रैक्टर इस्तेमाल किए. ये अवरोधक प्रदर्शनकारी किसानों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए घग्गर नदी पुल पर हरियाणा पुलिस द्वारा बैरिकेड के हिस्से के रूप में रखे गए थे.


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प्रदर्शनकारी किसानों ने पुलिस पर किया पथराव, कई घायल

हरियाणा पुलिस के एक प्रवक्ता ने कहा, प्रदर्शनकारियों द्वारा हरियाणा पुलिस पर पथराव किया गया. स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े गए. इस दौरान कई जवान घायल भी हुए जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया. पुलिस द्वारा आंसू गैस के कई गोले छोड़े जाने से हवा में धुएं की चादर छा गई है.

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शंभू बॉर्डर के बाद हरियाणा के जींद के पास किसानों पर आंसू गैस, पानी की बौछार छोड़ी गई

हरियाणा के जींद के पास आंसू गैस और पानी की बौछारों का सामना करना पड़ा. पुलिस ने किसानों को जींद जिले में खनौरी बॉर्डर से हरियाणा में प्रवेश करने से रोकने की कोशिश की. प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि दाता सिंहवाला-खनौरी बॉर्डर पर आंसू गैस के गोले दागे जाने से एक किसान घायल हो गया.

किसानों की क्या है मांग

किसान नेता फसलों के लिए एमएसपी की कानूनी गारंटी पर अड़े हुए हैं, जो उनकी प्रमुख मांगों में से एक है. एमएसपी के लिए कानूनी गारंटी के अलावा किसान स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने, किसानों और खेत मजदूरों के लिए पेंशन, कृषि ऋण माफी, पुलिस मामलों को वापस लेने की भी मांग कर रहे हैं.

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लेखक के बारे में

अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.

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