Delhi High Court news : दिल्ली हाईकोर्ट ने वैवाहिक बलात्कार मामले में सुनवाई करते हुए अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. आज दिल्ली हाईकोर्ट ने वैवाहिक बलात्कार को अपराध घोषित करने के मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करने के लिए केंद्र को और समय देने से इनकार कर दिया और विभिन्न याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया.
मामले को स्थगित करने से कोर्ट का इनकार
वैवाहिक बलात्कार मुद्दे पर उच्च न्यायालय ने कहा इस मसले को स्थगित करना संभव नहीं है, क्योंकि केंद्र की परामर्श प्रक्रिया कब पूरी होगी, इस संबंध में कोई निश्चित तारीख मालूम नहीं है.
राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से मांगी गयी राय
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने अभी मामले को स्थगित करने का अनुरोध करते हुए अदालत से कहा कि वैवाहिक बलात्कार को अपराध बनाये जाने का मसला काफी गंभीर है और इस मसले पर सभी राज्यों, केद्रशासित प्रदेशों से राय मांगी गयी है, उनके जवाब की प्रतीक्षा की जा रही है उसके बाद ही केंद्र इस विषय पर अपनी राय दे पायेगी.
कई सामाजिक समस्याएं उत्पन्न होंगी
जस्टिस राजीव शकधर और जस्टिस सी हरिशंकर की पीठ ने पक्षकारों के वकील से अपनी-अपनी रिट दाखिल करने को कहते हुए आदेश सुरक्षित रख लिया है. सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया तुषार मेहता ने कोर्ट के सामने कहा है कि वैवाहिक बलात्कार को अपराध की श्रेणी में लाने से कई तरह की सामाजिक समस्याएं उत्पन्न हो जायेंगी इसलिए इसपर व्यापक परामर्श की जरूरत है.
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अगली सुनवाई दो मार्च को होगी
केस की अगली सुनवाई दो मार्च को होगी. इस बीच, विभिन्न पक्षों के वकील अपनी लिखित दलीलें दर्ज करा सकते हैं, यह कोर्ट ने कहा है. हाई कोर्ट ने सात फरवरी को केंद्र को अपना पक्ष रखने के लिए दो सप्ताह का समय दिया था. केंद्र ने एक हलफनामा दायर कर अदालत से याचिकाओं पर सुनवाई टालने का आग्रह किया था. केंद्र ने कहा था कि राज्य सरकारों सहित विभिन्न पक्षों के साथ सार्थक परामर्श प्रक्रिया की आवश्यकता है.
