दक्षिणी दिल्ली में तीन मंजिला इमारत गिरी, मची चीख-पुकार

Delhi Building Collapse : दक्षिण दिल्ली के साकेत मेट्रो स्टेशन के पास शनिवार (30 मई) शाम एक तीन मंजिला कमर्शियल बिल्डिंग अचानक ढह गई. देखते ही देखते पूरी बिल्डिंग मलबे के ढेर में बदल गई. आशंका है कि मेडिकल छात्रों समेत कई लोग मलबे में फंसे हो सकते हैं.

Delhi Building Collapse : साकेत बिल्डिंग हादसे पर एनडीआरएफ कमांडेंट सुनील कुमार सिंह ने बताया कि मौके पर एनडीआरएफ की दो टीमें राहत और बचाव कार्य में जुटी हैं. फिलहाल मलबे में किसी जीवित व्यक्ति या बेहोश शव का कोई सुराग नहीं मिला है. इससे पहले पुलिस ने बताया था कि अब तक नौ लोगों को बचाया जा चुका है जबकि मलबे के नीचे दबे लोगों की तलाश के लिए कई एजेंसियों द्वारा अभियान चलाया जा रहा है.

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बिल्डिंग गिरने के बाद मलबे के नीचे से लोगों की मदद के लिए चीखें सुनाई दे रही थीं. एक स्थानीय निवासी ने बताया कि हादसे के वक्त जोरदार धूल का गुबार उठा और धूल छंटने पर पता चला कि पास की एक इमारत भी क्षतिग्रस्त हो गई है. साकेत मेट्रो स्टेशन के पास सैदुलजाब इलाके में स्थित इस तीन मंजिला इमारत में कोचिंग सेंटर, कैफे और दफ्तर चल रहे थे, जबकि तीसरी मंजिल पर निर्माण कार्य जारी था.

तीन मंजिला इमारत पूरी तरह से ढह गई

दिल्ली अग्निशमन सेवा (डीएफएस) के अनुसार, दमकलकर्मियों के पहुंचने से पहले ही स्थानीय और पीसीआर कर्मियों ने तीन लोगों को बचा लिया था जबकि अन्य लोगों को दमकल कर्मियों ने एनडीआरएफ की सहायता से बाहर निकाला. दमकल अधिकारियों ने बताया कि तीन मंजिला इमारत पूरी तरह से ढह गई और बगल में अस्थायी टिन की छत वाली कैंटीन पर गिर पड़ी, जहां छात्र खाना खा कर रहे थे.

करीब 100 से 150 लोग फंसे हो सकते हैं मलबे में

स्थानीय लोगों ने कहा कि ढह गई इमारत के नीचे करीब 100 से 150 लोग फंसे हो सकते हैं. परिसर में कई कैफे, कोचिंग संस्थान और कॉर्पोरेट कार्यालय थे. स्थानीय निवासी रविंद्र सिंह ने बताया कि इमारत अपेक्षाकृत नई थी और संभवतः चार-पांच साल पहले बनी थी. घटनास्थल पर मौजूद जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय के अधिकारी धर्मवीर सिंह ने बताया कि बचावकर्मी अब भी मलबे में फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि ढह चुकी इमारत के नीचे अब भी लगभग छह से सात लोगों के फंसे होने की आशंका है. उनके चेहरे बाहर से दिखाई दे रहे हैं और एनडीआरएफ के जवान उन्हें बचाने के लिए प्रयास कर रहे हैं.

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Published by: Amitabh Kumar

अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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