Delhi Building Collapse : साकेत बिल्डिंग हादसे पर एनडीआरएफ कमांडेंट सुनील कुमार सिंह ने बताया कि मौके पर एनडीआरएफ की दो टीमें राहत और बचाव कार्य में जुटी हैं. फिलहाल मलबे में किसी जीवित व्यक्ति या बेहोश शव का कोई सुराग नहीं मिला है. इससे पहले पुलिस ने बताया था कि अब तक नौ लोगों को बचाया जा चुका है जबकि मलबे के नीचे दबे लोगों की तलाश के लिए कई एजेंसियों द्वारा अभियान चलाया जा रहा है.
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बिल्डिंग गिरने के बाद मलबे के नीचे से लोगों की मदद के लिए चीखें सुनाई दे रही थीं. एक स्थानीय निवासी ने बताया कि हादसे के वक्त जोरदार धूल का गुबार उठा और धूल छंटने पर पता चला कि पास की एक इमारत भी क्षतिग्रस्त हो गई है. साकेत मेट्रो स्टेशन के पास सैदुलजाब इलाके में स्थित इस तीन मंजिला इमारत में कोचिंग सेंटर, कैफे और दफ्तर चल रहे थे, जबकि तीसरी मंजिल पर निर्माण कार्य जारी था.
तीन मंजिला इमारत पूरी तरह से ढह गई
दिल्ली अग्निशमन सेवा (डीएफएस) के अनुसार, दमकलकर्मियों के पहुंचने से पहले ही स्थानीय और पीसीआर कर्मियों ने तीन लोगों को बचा लिया था जबकि अन्य लोगों को दमकल कर्मियों ने एनडीआरएफ की सहायता से बाहर निकाला. दमकल अधिकारियों ने बताया कि तीन मंजिला इमारत पूरी तरह से ढह गई और बगल में अस्थायी टिन की छत वाली कैंटीन पर गिर पड़ी, जहां छात्र खाना खा कर रहे थे.
करीब 100 से 150 लोग फंसे हो सकते हैं मलबे में
स्थानीय लोगों ने कहा कि ढह गई इमारत के नीचे करीब 100 से 150 लोग फंसे हो सकते हैं. परिसर में कई कैफे, कोचिंग संस्थान और कॉर्पोरेट कार्यालय थे. स्थानीय निवासी रविंद्र सिंह ने बताया कि इमारत अपेक्षाकृत नई थी और संभवतः चार-पांच साल पहले बनी थी. घटनास्थल पर मौजूद जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय के अधिकारी धर्मवीर सिंह ने बताया कि बचावकर्मी अब भी मलबे में फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि ढह चुकी इमारत के नीचे अब भी लगभग छह से सात लोगों के फंसे होने की आशंका है. उनके चेहरे बाहर से दिखाई दे रहे हैं और एनडीआरएफ के जवान उन्हें बचाने के लिए प्रयास कर रहे हैं.
