Defense: वैश्विक शांति स्थापित करने के लिए परामर्श, सहयोग, समन्वय और क्षमता निर्माण पर करना होगा फोकस

शांति अभियानों को बेहतर बनाने के लिए सभी को आधुनिक तकनीक, संपन्न देशों से सैनिकों, पुलिस, साजो-सामान, प्रौद्योगिकी और विशेष क्षमताओं का सहयोग देना चाहिए. सुरक्षित संचार, निगरानी प्रणाली और मानवरहित प्रणाली जैसे नवाचार शांति अभियान को अधिक सुरक्षित और प्रभावी बना सकते हैं.

Defense: मौजूदा समय में वैश्विक स्तर पर शांति स्थापित करना सबसे बड़ी चुनौती है. शांति स्थापना की उभरती चुनौतियों से निपटने और वैश्विक शांति सुनिश्चित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिक भेजने वाले देशों के बीच परामर्श बढ़ाने, सहयोग, समन्वय और क्षमता निर्माण के 4सी सूत्र अपनाने पर जोर दिया गया है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 14 से 16 अक्टूबर तक पहली बार भारत द्वारा आयोजित किए जा रहे संयुक्त राष्ट्र सैन्य योगदानकर्ता देशों के शांति सेना प्रमुखों के सम्मेलन को संबोधित किया. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, मौजूदा समय में शांति सैनिकों के समक्ष चुनौतियां बढ़ी है. कठिन परिस्थितियों में तैनाती से लेकर विषम युद्ध, आतंकवाद और अस्थिर राजनीतिक हालात का सामना करना होता है और इस जटिल हालात में शांति सैनिकों को मानवीय संकटों, महामारियों या प्राकृतिक आपदाओं के बीच काम करने और गलत सूचना अभियानों तक का सामना करना पड़ता है. 


शांति अभियानों को बेहतर बनाने के लिए सभी को आधुनिक तकनीक, संपन्न देशों से  सैनिकों, पुलिस, साजो-सामान, प्रौद्योगिकी और विशेष क्षमताओं का सहयोग देना चाहिए. सुरक्षित संचार, निगरानी प्रणाली और मानवरहित प्रणाली जैसे नवाचार शांति अभियान को अधिक सुरक्षित और प्रभावी बना सकते हैं. इस दौरान चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ अनिल चौहान, वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह, शांति अभियानों के अवर महासचिव जीन पियरे लैक्रोइक्स, संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पर्वथानेनी हरीश, वरिष्ठ सेवारत अधिकारी और नौकरशाह तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे.

महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की जरूरत


रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने के संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों में हमेशा शामिल रहा है और इसी प्रतिबद्धता पर अडिग है. दशकों से लगभग दो लाख 90 हजार भारतीय सैन्‍य कर्मियों ने 50 से अधिक संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में सेवा दी है और व्यावसायिक दक्षता, साहस और करुणा के लिए वैश्विक सम्मान अर्जित किया है. कांगो और कोरिया से लेकर दक्षिण सूडान और लेबनान तक भारतीय सैनिक, पुलिस और चिकित्सा पेशेवर, कमजोर लोगों की रक्षा और समाज के पुनर्निर्माण के लिए अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के साथ कंधे से हमेशा कंधा मिलाकर खड़े रहे हैं. शांति स्थापना की सफलता केवल संख्या पर नहीं तैयारियों पर भी निर्भर करती है. भारत के पास मित्र देशों के शांति सैनिकों को प्रशिक्षण देने और उनके बीच पारस्परिक समझ विकसित करने की आवश्यक क्षमता है. 

प्रेरणादायक बदलाव है महिला कर्मियों की बढ़ती भागीदारी 

राजनाथ सिंह ने शांति स्थापना में महिला कर्मियों की बढ़ती भागीदारी को सबसे प्रेरणादायक बदलाव बताते हुए कहा कि महिलाओं की उपस्थिति अभियान की प्रभावशीलता बढ़ाती है, स्थानीय लोगों के साथ विश्वास स्थापित करती है. शांति स्थापना में महिला कर्मियों की भागीदारी में भारत अग्रणी रहा है. वर्ष 2007 में लाइबेरिया में तैनात हमारी महिला पुलिस इकाई सशक्तिकरण का वैश्विक प्रतीक बन गयी. भारतीय महिला कर्मी दक्षिण सूडान, गोलन हाइट्स और लेबनान में अभियानों में सेवारत हैं और वे गश्त का नेतृत्व कर समुदायों के साथ जुड़ रही हैं और स्थानीय महिलाओं और युवाओं को सलाह दे रही हैं. 

रक्षा मंत्री ने कहा कि मौजूदा समय में कुछ देश अंतरराष्ट्रीय नियमों का खुलेआम उल्लंघन कर रहे हैं, और उन्हें कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि कुछ अपने नियम बनाकर अगली सदी पर अपना दबदबा कायम करना चाहते हैं. जबकि भारत पुरानी अंतर्राष्ट्रीय संरचनाओं में सुधार की वकालत करते हुए अंतरराष्ट्रीय नियम-आधारित व्यवस्था सुदृढ़ बनाए रखने को प्रतिबद्ध है. भारत महात्मा गांधी की भूमि है, जहां शांति अहिंसा और सत्य के दर्शन गहराई से समाहित है. 

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By Anjani Kumar Singh

Anjani Kumar Singh is a contributor at Prabhat Khabar.

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