कोरोना त्रासदी : मनरेगा में मजदूरी करने को मजबूर हैं शिक्षक, कभी मिलता था 20,000 वेतन, अब 235 रुपये में काट रहे मिट्टी

राजस्‍थान के जयपुर के पास आसलपुर जोबनेर गांव में M.A., B.Ed करे हुए कुछ शिक्षक मनरेगा में मजदूरी करने को मजबूर हैं. अपना और अपने परिवार का पेट भरने के लिए ये लोग 220 और 235 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से मजदूरी कर रहे हैं.

जयपुर : कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया को अपनी गिरफ्त में ले लिया है. इस महामारी से अब तक पूरी दुनिया में करीब 55 लाख से अधिक लोग संक्रमित हुए हैं, तो साढे तीन लाख से अधिक लोगों की मौत भी हो चुकी है. कोरोना संकट के कारण कई देशों की आर्थिक हालात पूरी तरह से खराब हो चुके हैं. लोगों के पास काम नहीं है, पैसे नहीं हैं. दो वक्‍त की रोटी के लिए लोग तरस रहे हैं. कोरोना के कारण न केवल लोगों की मौत हो रही है, बल्कि घर, परिवार से लेकर मुंह से निवाला भी छीन गया है.

कोरोना संकट से अगर कोई वर्ग सबसे अधिक प्रभावित हुआ है तो वो है गरीब, मजदूर वर्ग. काम की तलाश में एक राज्‍य से दूसरे राज्‍यों में जाने के लिए मजबूर मजदूरों के पास अब काम नहीं है और मजबूरी में उन्‍हें जैसे-तैसे अपने घर लौटने पड़ रहे हैं. उनके लिए तो ‘एक और कुंआ, तो दूसरी ओर खाई’ वाली स्थ‍िति हो गयी है. इतिहासकार और अर्थशास्त्री रामचंद्र गुहा ने भी इस संकट को ‘सबसे बड़ी मानव निर्मित त्रासदी’ बताया है. उन्‍होंने कहा, कोरोना वायरस से निपटने के लिए लागू लॉकडाउन के कारण लाखों गरीब लोग जिस संकट से जूझ रहे हैं, वह भारत में बंटवारे के बाद ‘सबसे बड़ी मानव निर्मित त्रासदी’ है.

कोरोना काल में गरीबी का भयंकर मंजर कभी किसी ने कल्‍पना भी नहीं की होगी. राजस्‍थान से एक ऐसी खबर आ रही है जिसे जानकर दंग रह जाएंगे. दरअसल कोरोना वायरस महामारी के चलते देश में स्कूल बंद हैं, वैसे में राजस्‍थान के एक गांव के शिक्षकों को घर का खर्च पूरा करने के लिए मनरेगा में मजदूरी करना पड़ रहा है.

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राजस्‍थान के जयपुर के पास आसलपुर जोबनेर गांव में M.A., B.Ed करे हुए कुछ शिक्षक मनरेगा में मजदूरी करने को मजबूर हैं. अपना और अपने परिवार का पेट भरने के लिए ये लोग 220 और 235 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से मजदूरी कर रहे हैं.

हिन्दी के शिक्षक रामअवतार सिंह ने बताया, स्कूल में मुझे 20,000 वेतन मिलता था, यहां मुझे 235 रुपये प्रतिदिन मिलते हैं. उन्‍होंने कहा, इस योजना के तहत काम करने से हमें संकट के इस समय में राहत मिली है और हम इसके लिए राज्य सरकार के आभारी हैं. मैं प्रति माह 20,000 रुपये कमाता था और अब मैं एक दिन में 235 रुपये कमाता हूं.

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मालूम हो देश में कोरोना संक्रमण के कारण दो महीने से पूरे देश में लॉकडाउन लगाया गया है, जिसमें स्‍कूल-कॉलेजों को खोलने की मंजूरी नहीं मिली है. अभी ऐसी ही स्थिति आगे भी रहने की उम्‍मीद की जा रही है.

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लेखक के बारे में

Published by: Arbindkumar mishra

अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.

झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.

करियर का सफरनामा

अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग

खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:

34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.

पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.

पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.

शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)

UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.

बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.

एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.

लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.

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