Congress: संसद के विशेष सत्र बुलाने के फैसले को कांग्रेस ने बताया सत्ता का दुरुपयोग

परिसीमन को लेकर सरकार की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गयी है. संसद को इस बारे में सूचित नहीं किया गया. इससे सरकार की मंशा पर सवाल उठता है. कांग्रेस पार्टी इस मामले में विपक्षी दलों की बैठक बुलाएगी और सभी मुद्दों पर चर्चा के बाद विशेष सत्र में विपक्ष अपना रुख तय करेगा.

Congress:पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव के बीच संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण में संशोधन करने के सरकार के फैसले पर सियासत तेज हो गयी है. कांग्रेस का आरोप है कि सियासी लाभ हासिल करने के लिए सरकार की ओर से विधानसभा के बीच में संसद का विशेष सत्र आयोजित किया जा रहा है. इस सत्र में लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने वाले नारी वंदन अधिनियम में संशोधन किया जाएगा. कांग्रेस का आरोप है कि यह कानून वर्ष 2023 में पारित किया गया था, आखिर पांच राज्यों के चुनाव के बीच सरकार क्यों जल्दबाजी दिखा रही है. सरकार की मंशा सिर्फ चुनावी लाभ हासिल करने की है. यह चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन है और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास है. 

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि सरकार महिला आरक्षण कानून और परिसीमन से जुड़े विधेयक को पेश कर चुनावी लाभ हासिल करना चाहती है. इसे आखिरी चरण का चुनाव पूरा होने के बाद भी पेश किया जा सकता था. वर्ष 2023 में पारित कानून को लेकर इतनी जल्दबाजी दिखाने से साफ जाहिर होता है कि चुनाव को प्रभावित करने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है.परिसीमन को लेकर दक्षिण राज्यों की चिंताएं है. छोट राज्य और दक्षिण के राज्यों को परिसीमन के बाद लोकसभा सीट बढ़ने की स्थिति में नुकसान होगा. उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में लोकसभा की सीट 80 से बढ़कर 120 हो जाएगी, जबकि केरल जैसे राज्य में सीटों की संख्या उस अनुपात में नहीं बढ़ेगी.

 विपक्ष को अंधेरे में रखा गया

रमेश ने कहा कि परिसीमन को लेकर सरकार की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गयी है. संसद को इस बारे में सूचित नहीं किया गया. इससे सरकार की मंशा पर सवाल उठता है. कांग्रेस पार्टी इस मामले में विपक्षी दलों की बैठक बुलाएगी और सभी मुद्दों पर चर्चा के बाद विशेष सत्र में विपक्ष अपना रुख तय करेगा. सरकार को ऐसे महत्वपूर्ण विधेयक पर सभी दलों के साथ चर्चा कर आगे बढ़ने का काम करना चाहिए. संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कांग्रेस को बातचीत के लिए पत्र लिखा था. कांग्रेस ने इस बाबत सभी दलों की बैठक बुलाने की मांग की थी. विपक्षी दलों से सलाह किए बिना सरकार ने अचानक विशेष सत्र बुलाने का फैसला कर दिया.

गौरतलब है कि राज्यसभा में गुरुवार को संसदीय कार्य मंत्री और विपक्ष के बीच इस मसले पर जमकर बहस हुई थी. विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा था कि सरकार को पांच राज्यों में अंतिम चरण के मतदान के बाद इस विधेयक को पेश करना चाहिए. इसपर सरकार की ओर से कहा गया कि समय कम है और इसे पारित करना जरूरी है. संसद का विशेष सत्र 16-18 अप्रैल तक होगा. इस विधेयक को पारित करने के लिए दो-तिहाई बहुमत का होना जरूरी है और इसके लिए विपक्षी दलों का सहयोग जरूरी है. 

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By Vinay Tiwari

Vinay Tiwari is a contributor at Prabhat Khabar.

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