Coal India: कोरोना के दौरान अनाथ हो चुके कई बच्चों को छात्रवृत्ति जारी किया

Coal India: कोरोना के दौरान माता-पिता खो चुके बच्चों की पढ़ाई के लिए कोल इंडिया लिमिटेड ने आशीष योजना के तहत बच्चों को छात्रवृत्ति मुहैया करा रहा है. प्रत्येक बच्चे को चार साल तक सालाना 45 हजार रुपये दिया जायेगा. साथ ही कंपनी के काम के दौरान जान गंवाने वाले परिवार के 424 लोगों को अनुकंपा के आधार पर सौंपा नियुक्ति पत्र

Coal India: कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी(सीएसआर) के तहत कोल इंडिया लिमिटेड(सीआईएल) समाज सेवा के क्षेत्र में कई काम कर रहा है. इस कड़ी में सीआईएल ने आशीष (आयुष्मान शिक्षा सहायता) योजना शुरू की. इस योजना के तहत कोरोना महामारी के दौरान माता-पिता खो चुके 1645 बच्चों को छात्रवृत्ति प्रदान की गयी है ताकि बच्चों की आर्थिक परेशानी से पढ़ाई पर असर नहीं पड़े. माता-पिता खो चुके बच्चे आगे पढ़ाई जारी रखने में कई तरह की परेशानी का सामना कर रहे थे. यही नहीं कोल इंडिया लिमिटेड ने अनुकंपा के आधार पर 424 लाभार्थियों को नियुक्ति पत्र भी सौंपा गया. यह नियुक्ति ऐसे लोगों को दी गयी, जिन्होंने कंपनी में काम के दौरान अपने परिवार के सदस्यों को खो दिया था. इस नौकरी से परिवारों को आर्थिक तौर पर मदद मिलेगी.

 सुप्रीम कोर्ट परिसर में हुआ आयोजन

शनिवार को सुप्रीम कोर्ट परिसर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान छात्रों को छात्रवृत्ति और अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति पत्र सौंपा गया. शीर्ष अदालत के 75 वर्ष पूरे होने के मौके पर 29 जुलाई से 3 अगस्त, 2024 के दौरान मामलों के निपटारे के लिए लोक अदालत आयोजित करने की एक अनूठी पहल मुख्य न्यायाधीश द्वारा की गयी. सीआईएल का कार्यक्रम विशेष लोक अदालत के समापन समारोह के दौरान आयोजित किया गया. कार्यक्रम के दौरान मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और केंद्रीय कानून एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने 25 बच्चों को छात्रवृत्ति के लिए डमी चेक सौंपे और 10 महिला आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति पत्र दिया. इस कार्यक्रम में न्यायाधीश, रजिस्ट्री के अधिकारी, वरिष्ठ वकीलों के अलावा कोयला मंत्रालय और कानून एवं न्याय मंत्रालय के अधिकारी और सीआईएल और उसकी सहायक कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे.

 क्या है आशीष योजना

सीआईएल आशीष योजना के तहत पात्र बच्चों को चार साल की अवधि के लिए सालाना 45 हजार रुपये की छात्रवृत्ति देगा ताकि बच्चे पढ़ाई पूरी कर सपने काे साकार कर सकें. पात्र बच्चों की पहचान विभिन्न हाईकोर्ट द्वारा उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर की गयी है. 

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Published by: Vinay tiwari

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