अहमदाबाद : मामूली सी दुर्घटना के बाद हत्या, गुस्साए लोगों ने बिहारवासी की दुकान फूंकी

Clash in Gujarat : मैं बिहार का रहने वाला हूं, यहां पंक्चर बनाने का काम करता था. मैंने किसी का क्या बिगाड़ा था, देर रात उन्होंने मेरी दुकान में आग लगा दी. सबकुछ जलकर खाक हो गया है. मैंने 5 लाख का लोन लिया था, इस दुकान के लिए ताकि अपने बच्चों को पढ़ा सकूं, उन्हें पैसे भेज सकूं. मैं अब क्या करूं, कहां जाऊं? यह उस पीड़ित का बयान है, जिसकी दुकान में अहमदाबाद के धंधुका इलाके में हुई हिंसा के बाद आग लगा दी गई थी.

Clash in Gujarat : अहमदाबाद जिले के धंधुका इलाके में शनिवार को हुई एक मामूली दुर्घटना में दो समुदायों के लोगों के बीच तनाव इतना बढ़ा कि एक व्यक्ति की हत्या कर दी गई और बाद में कई दुकानों में आग भी लगाई गई.

मोटरसाइकिल भिड़ंत से शुरू हुई लड़ाई

एएनआई न्यूज एजेंसी के अनुसार शनिवार को एक मोटरसाइकिल दुर्घटना हुई, जिसमें दो अलग-अलग समुदाय के दो युवकों के बीच झड़प हुई. बात इतनी बढ़ गई कि बाद में 8-10 लोग दूसरे के घर पहुंच गए और एक व्यक्ति जिसका नाम धर्मेश गमारा है उसे चाकू मार दिया. चाकू मारने की वजह से धर्मेश की मौत हो गई. इस घटना के बाद गुस्साए लोगों ने दूसरे समुदाय के लोगों की कई दुकानों को आग के हवाले कर दिया. क्षेत्र में तनाव व्याप्त है.

बिहार के व्यक्ति की दुकान को आग के हवाले किया

धर्मेश की मौत के बाद गुस्साए लोगों ने दुकान किनारे की कई दुकानों को आग के हवाले कर दिया. इनमें से एक दुकान बिहार के मोहम्मद साबिर की थी. उन्होंने रोते हुए एएनआई को बताया कि मैं बिहार से हूं. मैं यहां पंक्चर ठीक करने का काम करता था. मैंने इस दुकान के लिए लोन लिया था. लेकिन मेरी दुकान में आग लगा दी गई. मैं बर्बाद हो गया हूं. अब मैं क्या करूं? मुझे 5-5.5 लाख रुपये का नुकसान हुआ है. यह कल करीब 3-3.30 बजे हुआ. मैंने अपनी दुकान बंद कर दी थी और दूर खड़ा था कि वे मुझे भी मार डालेंगे.

मैं छिपा हुआ था और उन्होंने मेरी आंखों के सामने मेरी दुकान में आग लगा दी. मुझमें बाहर आकर बोलने की हिम्मत नहीं थी. मैं बाहर का आदमी हूं, उन्होंने मेरी दुकान में आग क्यों लगाई? मैंने किसी का क्या बिगाड़ा? वे 15-20 लोग थे और उनके हाथों में डंडे थे. मैं यहां अकेला रहता हूं. मैं यहां रोजी-रोटी कमाने आया था ताकि अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए कुछ पैसे घर भेज सकूं. अब मैं क्या करूं? मैं कहां जाऊं?

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Published by: Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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