युद्ध की तैयारी में चीन! पीएम मोदी रख रहे हैं पैनी नजर

चीन की हरकतों को देखते हुए सेनाध्यक्ष मनोज मुकुंद नरवणे अपने शीर्ष कमांडरों के साथ बुधवार को यानी आज बैठक करेंगे. वहीं पूर्वी लद्दाख सीमा पर चीन के साथ जारी तनातनी के बीच भारत अपने सख्त रुख पर कायम है.

चीन की हरकतों को देखते हुए सेनाध्यक्ष मनोज मुकुंद नरवणे अपने शीर्ष कमांडरों के साथ बुधवार को यानी आज बैठक करेंगे. वहीं पूर्वी लद्दाख सीमा पर चीन के साथ जारी तनातनी के बीच भारत अपने सख्त रुख पर कायम है. पूर्वी लद्दाख सीमा पर भारत और चीनी सैनिकों के दरम्यान तनाव बढ़ने के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत और तीनों सेनाओं के प्रमुखों के साथ बैठक की, जिसमें बाह्य सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिये भारत की सैन्य तैयारियों को मजबूत बनाने पर ध्यान केंद्रित किया गया.

समझा जाता है कि शीर्ष सैन्य अधिकारियों ने मोदी को पूर्वी लद्दाख में उभरती स्थिति की जानकारी दी. हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि पूर्व निर्धारित बैठक का एजेंडा महत्वाकांक्षी सैन्य सुधार और भारत की सैन्य ताकत को मजबूत बनाने के बारे में चर्चा करना था. यह बैठक ऐसे समय में हुई जब कुछ ही घंटे पहले चारों जनरलों ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को पैंगोंग सो झील, गलवान घाटी, डेमचोक और दौलत बेग ओल्डी की स्थिति के बारे में जानकारी दी, जहां पिछले करीब 20 दिनों से भारत और चीन के सैनिक आक्रामक रूख अपनाये हुए हैं.

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सैन्य प्रतिष्ठान से जुड़े लोगों का कहना है कि प्रधानमंत्री को लद्दाख की स्थिति से अवगत कराया गया. हालांकि, इस बैठक के बारे में कोई आधिकारिक टिप्पणी या ब्योरा नहीं आया है. आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल लद्दाख और उत्तरी सिक्किम एवं उत्तराखंड में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर उभरती स्थिति पर नजर रखे हुए हैं. एक अधिकारी ने नाम नहीं उजागर करने की शर्त पर बताया कि भारत पर सैन्य दबाव बनाने की चीन की रणनीति काम नहीं करेगी. हम वास्तविक नियंत्रण रेखा पर यथास्थिति कायम रखना चाहते हैं.

बहरहाल, बैठक में शीर्ष सैन्य अधिकारियों ने मोदी को वास्तविक नियंत्रण रेखा पर महत्वपूर्ण आधारभूत परियोजनाओं के लागू होने की स्थिति के बारे में जानकारी दी. आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि भारत, चीन से लगने वाली 3500 किलोमीटर की सीमा पर सामरिक क्षेत्रों में आधारभूत ढांचे के विकास की परियोजनाओं को नहीं रोकेगा और चीन के इन्हें रोकने के किसी तरह के दबाव में नहीं आयेगा. समझा जाता है कि रक्षा मंत्री ने शीर्ष सैन्य अधिकारियों के साथ पहले ही कह दिया है कि लद्दाख, सिक्किम, उत्तराखंड या अरुणाचल प्रदेश में एलएसी पर किसी भी महत्वपूर्ण परियोजना के क्रियान्वयन की समीक्षा करने की कोई जरुरत नहीं है.

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इस बीच, सूत्रों ने बताया कि भारत और चीन के बीच पिछले 20 दिनों से जारी गतिरोध के बीच भारतीय सेना ने उत्तरी सिक्किम, उत्तराखंड और अरूणाचल प्रदेश के साथ लद्दाख से जुडे संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी को मजबूत बनाया है, जो ऐसा संदेश देने के लिये है कि भारत, चीन के आक्रामक सैन्य रुख के दबाव में बिल्कुल नहीं आयेगा. गौरतलब है कि लद्दाख में स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई जब करीब 250 चीनी और भारतीय सैनिकों के बीच 5 मई को झड़प हो गई और इसके बाद स्थानीय कमांडरों के बीच बैठक के बाद दोनों पक्षों में कुछ सहमति बन सकी. इस घटना में भारतीय और चीनी पक्ष के 100 सैनिक घायल हो गए थे. इस घटना पर चीन ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी. 9 मई को उत्तरी सिक्किम में भी ऐसी ही घटना सामने आई थी.

शी ने चीन की सेना से कहा, युद्ध की तैयारियां तेज करें

चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने सबसे खराब स्थिति की कल्पना करते हुए सेना को युद्ध की तैयारियां तेज करने का मंगलवार को आदेश दिया और उससे पूरी दृढ़ता से देश की सम्प्रभुता की रक्षा करने को कहा. देश की सत्तारूढ़ चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) के महासचिव और करीब 20 लाख सैनिकों वाली सेना के प्रमुख 66 वर्षीय शी ने यहां चल रहे संसद सत्र के दौरान पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) और पीपुल्स आर्म्ड पुलिस फोर्स के प्रतिनिधियों की पूर्ण बैठक में हिस्सा लेते हुए यह टिप्प्णी की. सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ की खबर के मुताबिक, शी ने सेना को आदेश दिया कि वह सबसे खराब स्थिति की कल्पना करे, उसके बारे में सोचे और युद्ध के लिए अपनी तैयारियों और प्रशिक्षण को बढ़ाए, तमाम जटिल परिस्थितियों से तुरंत और प्रभावी तरीके से निपटे. साथ ही पूरी दृढ़ता के साथ राष्ट्रीय सम्प्रभुता, सुरक्षा और विकास संबंधी हितों की रक्षा करे.

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