केंद्र ने SC में कहा -सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी की समीक्षा ना करे कोर्ट

Sabarimala Temple : सुप्रीम कोर्ट की 9 सदस्यीय बेंच सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के मसले पर 2018 में दिए गए अपने फैसले की समीक्षा कर रही है. उस वक्त कोर्ट ने यह कहा था कि पाबंदी अवैध और असंवैधानिक है. सुनवाई के दौरान केंद्र ने पाबंदी की वकालत की.

Sabarimala Temple : केंद्र सरकार ने सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर लगी पाबंदी के मसले पर सुप्रीम कोर्ट में कहा कि यह मसला धार्मिक आस्था से जुड़ा है, इसलिए यह मामला न्यायिक समीक्षा से बाहर का है. दरअसल सबरीमाला मंदिर में मासिक धर्म की आयु वाली महिलाओं के प्रवेश पर रोक है. यह उम्र सीमा 10 से 50 वर्ष के बीच की है.

हर चीज गरिमा या शारीरिक स्वतंत्रता से जुड़ी नहीं हो सकती

सुप्रीम कोर्ट में केंद्र की ओर से उपस्थित भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने 9 सदस्यीय संविधान पीठ के सामने कहा कि यदि कोई प्रथा अवैज्ञानिक है, तो उसका समाधान संसद के पास है. प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली इस पीठ में जस्टिस बीवी नागरत्ना, जस्टिस एम एम सुंदरेश, जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह, जस्टिस अरविंद कुमार, जस्टिस ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह, जस्टिस प्रसन्ना बी वराले, जस्टिस आर महादेवन और जस्टिस जॉयमाल्या बागची भी शामिल हैं. तुषार मेहता ने कोर्ट के सामने कहा कि हमें हर संप्रदाय की परंपरा का सम्मान करना होगा; हर चीज गरिमा या शारीरिक स्वतंत्रता से जुड़ी नहीं है. अगर मैं मजार या गुरुद्वारा जाता हूं, तो मुझे सिर ढंकना पड़ता है, तो मैं इस बात को अपनी गरिमा और अधिकार से जोड़कर नहीं देख सकता.

हर प्रथा पर रोक उचित नहीं

तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट के सामने यह कहा कि हम अदालत से यह स्पष्ट तौर पर कहना चाहते हैं कि वह इस तरह किसी भी प्रथा की समीक्षा ना करे, जिसके बारे में यह कहा जा रहा हो कि वह तर्कसंगत और वैज्ञानिक रूप से सही नहीं है. यह एक तरह से संवैधानिक बदलाव है, जिसे संविधान में संशोधन के समान माना जाएगा.

2018 में कोर्ट ने महिलाओं के प्रवेश पर रोक को अवैध बताया था

सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को अवैध बताते हुए सु्‌प्रीम कोर्ट ने 2018 में 4:1 के बहुमत से महिलाओं के प्रवेश पर लगे प्रतिबंध को हटा दिया था और इसे अवैध और असंवैधानिक करार दिया था. बाद में 14 नवंबर 2019 को, चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने महिलाओं से भेदभाव के मुद्दे को 3:2 के बहुमत से बड़ी पीठ को भेज दिया था. इस फैसले में सबरीमाला मंदिर के अलावा मस्जिद, दरगाह और पारसियों के पवित्र स्थल में महिलाओं के प्रवेश से संबंधित मसलों पर विचार करने के लिए 9 सदस्यीय बेंच के पास मामला भेज दिया था.

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By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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