प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकातों में एक चीज बार-बार सुर्खियां बनती है, दोनों नेताओं का एक ही कार में सफर करना. 31 अगस्त 2026 को किर्गिस्तान के बिश्केक में एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों एक ही कार से विश्व नोमैड गेम्स के उद्घाटन समारोह पहुंचे थे. उसके बाद अब 11 सितंबर को नई दिल्ली में द्विपक्षीय बैठक के बाद दोनों ने साथ कार से इनोप्रोम (INNOPROM) प्रदर्शनी तक यात्रा की.
हालांकि व्लादिमीर पुतिन पहले विदेशी नेता नहीं है जिसके साथ पीएम मोदी कार राइड करते हैं. प्रधानमंत्री बनने के बाद से अलग-अलग विदेशी नेताओं के साथ 11 बार कार में साथ-साथ सफर कर चुके हैं.
क्यों खास मोदी-पुतिन की कार राइड ?
मोदी और पुतिन के बीच यह सिलसिला नया नहीं है. सितंबर 2025 में चीन के तियानजिन में SCO बैठक के दौरान दोनों साथ कार में नजर आए थे. उससे पहले दिसंबर 2025 में पुतिन की भारत यात्रा के दौरान भी दोनों नेताओं ने साथ में कार से यात्रा की थी. पिछले 1 साल में 4 बार दोनों नेताओं ने साथ में कार राइड की है.
- 1 सितंबर 2025 को तियानजिन में SCO समिट के बाद पुतिन और मोदी ओरस सीनेट कार में एक साथ रिट्ज-कार्लटन गए. पुतिन ने मोदी का करीब 10 मिनट इंतजार किया. रास्ते में दोनों की बातचीत हुई. रिपोर्टों के मुताबिक, कार से होटल पहुंचने के बाद भी करीब 45 मिनट तक बातचीत जारी रही.
- 4 दिसंबर 2025 को दिल्ली में भारत पुतिन के भारत पहुंचने के बाद मोदी खुद पालम एयरपोर्ट पहुंचे. दोनों एक ही टयोया फॉर्च्यूनर से एयरपोर्ट से 7, लोक कल्याण मार्ग के लिए रवाना हुए.
- 31 अगस्त 2026 को बिश्केक में किर्गिस्तान SCO के दौरान मोदी और पुतिन की द्विपक्षीय बैठक के बाद दोनों एक ही ओरस सीनेट में बैठकर वर्ल्ड नोमैड गेम्स के उद्घाटन समारोह में पहुंचे.
- 11 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में द्विपक्षीय बैठक के बाद दोनों ने साथ कार से इनोप्रोम(INNOPROM) प्रदर्शनी तक यात्रा की.
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दुनिया को क्या संदेश?
- मोदी-पुतिन की यह अनौपचारिक केमिस्ट्री बताती है कि बदलती वैश्विक राजनीति के बीच भारत और रूस अपने विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को बनाए रखना चाहते हैं.
- साथ ही भारत यह संदेश देता है कि वह अलग-अलग शक्तियों के साथ अपने रिश्ते अपनी रणनीतिक जरूरतों के हिसाब से आगे बढ़ा सकता है. यानी कार छोटी है, लेकिन इसका डिप्लोमैटिक संदेश काफी बड़ा है.
- बिश्केक में कार यात्रा से पहले दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय बातचीत की, जिसमें ऊर्जा, रक्षा, अंतरिक्ष, व्यापार और दूसरे क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा हुई. मोदी ने यूक्रेन संघर्ष के समाधान के लिए बातचीत और कूटनीति पर भी जोर दिया.
क्या होती है कार डिप्लोमेसी?
कार डिप्लोमेसी कोई आधिकारिक कूटनीतिक प्रोटोकॉल नहीं है. यह उस अनौपचारिक अंदाज के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द है, जब दो देशों के शीर्ष नेता औपचारिक बैठकों के अलावा एक ही कार में सफर करते दिखाई देते हैं. इसका सबसे बड़ा संदेश होता है, सहजता, व्यक्तिगत तालमेल और आपसी भरोसा.
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