BRICS: ब्रिक्स के सभी 10 देशों की संसदों ने पहलगाम आतंकी हमलों की कड़ी निंदा की

ब्रिक्स सम्मेलन की सबसे बड़ी उपलब्धि सर्वसम्मति से अपनाया गया कंप्रिहेंसिव संयुक्त घोषणा पत्र है, जिसके पैरा 25 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की गई. इसमें क्रॉस बॉर्डर टेररिज्म, टेररिज्म फाइनेंसिंग और सेफ हेवन के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों में आतंकवाद की निंदा की गयी है.

BRICS: ब्राज़ीलिया में आयोजित 11वें ब्रिक्स संसदीय फोरम के वार्षिक सम्मेलन में भारत सहित 10 सदस्य देशों की संसदों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया. इस बैठक में ब्रिक्स के सभी 10 देशों की संसदों ने पहलगाम आतंकी हमले की निंदा की और आतंकवाद के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस नीति पर सहयोग के लिए सहमति जतायी. 3 से 5 जून तक चले ब्रिक्स संसदीय मंच में भाग लेने वाले 10 सदस्य देश थे, जिसमें भारत, ब्राजील, रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात, मिस्र, इथियोपिया और इंडोनेशिया. इन देशों की संसदों के प्रतिनिधियों ने सम्मेलन में सक्रिय भागीदारी की और साझा घोषणापत्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

सम्मेलन के सफल आयोजन और भारत के पक्ष को ब्रिक्स देशों की ओर से स्वीकार कर एक संयुक्त घोषणा पत्र जारी की गयी, जिसे भारत के पक्ष में माना जा रहा है. ब्रिक्स के ब्रासीलिया सम्मेलन की सबसे बड़ी उपलब्धि सर्वसम्मति से अपनाया गया कंप्रिहेंसिव संयुक्त घोषणा पत्र है. जिसके पैरा 25 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की गई. इसमें क्रॉस बॉर्डर टेररिज्म, टेररिज्म फाइनेंसिंग और सेफ हेवन के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों में आतंकवाद की निंदा की गयी है.

आतंकवादी देशों को ठहराया जायेगा जवाबदेह

ब्रिक्स सम्मेलन से लौटकर आये राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने मीडिया से बातचीत में कहा कि संयुक्त घोषणा पत्र में  रेखांकित किया गया कि आतंकवादी गतिविधियों में शामिल लोगों और उनके समर्थन को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए. उन्हें न्याय के कटघरे में लाया जाना चाहिए. इसमें आतंकवाद के प्रति भारत की जीरो टॉलरेंस नीति को रेखांकित करता है. उन्होंने कहा कि सम्मेलन के दौरान अनेक दौर की गहन चर्चाओं और विचार-विमर्श के पश्चात, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), वैश्विक व्यापार और अर्थव्यवस्था, अंतर-संसदीय सहयोग, वैश्विक शांति और सुरक्षा जैसे प्रमुख विषयों पर व्यापक सहमति बनी.

भारत के दृष्टिकोण को सभी देशों ने सराहा और उसे सर्वसम्मति से अंतिम संयुक्त घोषणा में शामिल किया गया. विशेष रूप से, आतंकवाद के मुद्दे पर भारत की निर्णायक नीति को गंभीरता से स्वीकार किया गया. भारत ने आतंकवादी हमलों की स्पष्ट और कड़ी निंदा की और आतंकवाद के विरुद्ध “ज़ीरो टॉलरेंस” नीति को अपनाने की आवश्यकता को जोरदार ढंग से रखा. भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने किया. इसके साथ ही लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को 12 वें ब्रिक्स संसदीय फोरम सम्मेलन की अध्यक्षता सौंपी गई. 

आतंकवाद के विरुद्ध एकजुट होकर काम करेगी ब्रिक्स देशों की संसदें

संयुक्त घोषणा में भारत के पहलगाम में हुए हालिया आतंकी हमले की कठोर शब्दों में निंदा की गई, और यह सहमति बनी कि सभी ब्रिक्स देशों की संसदें आतंकवाद के विरुद्ध एकजुट होकर कार्य करेंगी. भारत की ओर से आतंकवादी संगठनों को मिलने वाली आर्थिक मदद को रोकने, खुफिया जानकारी के आदान-प्रदान, आधुनिक तकनीकों के दुरुपयोग को रोकने तथा जांच और न्यायिक प्रक्रियाओं में सहयोग जैसे पहलुओं पर साझा प्रयास करने पर जोर दिया. भारत की नीति और नेतृत्व को विशेष रूप से सराहा गया, और ब्रिक्स संसदों द्वारा यह स्वीकार किया गया कि वैश्विक शांति और सुरक्षा बनाए रखने में सभी राष्ट्रों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है.

सम्मेलन में विभिन्न विषयों, विशेष रूप से आतंकवाद के विरुद्ध वैश्विक सहयोग, न्यायोचित और संतुलित वैश्विक व्यवस्था, तकनीकी नवाचारों में सहभागिता तथा लोकतांत्रिक आदान-प्रदान पर भारत की स्पष्ट और सशक्त भूमिका को प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया गया. भारतीय प्रतिनिधिमंडल में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, राज्यसभा सांसद सुरेंद्र सिंह नागर, लोकसभा सांसद विजय बघेल, लोकसभा सांसद विवेक ठाकुर, लोकसभा सांसद डॉ. शबरी बायरेड्डी, लोकसभा महासचिव उत्पल कुमार सिंह, राज्यसभा महासचिव पी.सी. मोदी, तथा लोकसभा सचिवालय के वरिष्ठ अधिकारी सम्मिलित थे.

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By Anjani Kumar Singh

Anjani Kumar Singh is a contributor at Prabhat Khabar.

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