Sunny Deol Missing Posters: सनी देओल हुए लापता? पठानकोट में भाजपा सांसद के लगे पोस्टर

पोस्टर देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि बॉलीवुड अभिनेता सनी देओल से गुरदासपुर की जनता खासा नाराज है. लोगों का आरोप है कि सनी देओल जब से सांसद बने हैं, तब से गुरदासपुर नहीं आये हैं. एक स्थानीय प्रदर्शनकारी ने कहा, सांसद बनने के बाद सनी देओल कभी गुरदासपुर नहीं गए.

बॉलीवुड के फेमस कलाकार और भारतीय जनता पार्टी के सांसद सनी देओल लापता चल रहे हैं. यह हम नहीं बल्कि पंजाब पठानकोट की जनता बोल रही है. लोगों ने अभिनेता से सांसद बने सनी देओल लापता का पोस्टर भी इलाके में चस्पा किया है.

रेलवे स्टेशन में भी सनी देओल लापता के पोस्टर लगे

सनी देओल लापता के पोस्टर घरों, रेलवे स्टेशन और वहनों पर भी चिपकाये गये हैं. पोस्टर में लिखा गया है, गुमशुदा की तलाश….सनी देओल, सांसद गुरदासपुर.

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सनी देओल से खासा नाराज हैं गुरदासपुर के लोग?

पोस्टर देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि बॉलीवुड अभिनेता सनी देओल से गुरदासपुर की जनता खासा नाराज है. लोगों का आरोप है कि सनी देओल जब से सांसद बने हैं, तब से गुरदासपुर नहीं आये हैं. एक स्थानीय प्रदर्शनकारी ने कहा, सांसद बनने के बाद सनी देओल कभी गुरदासपुर नहीं गए. वह खुद को पंजाब का बेटा कहते हैं, लेकिन उन्होंने कोई औद्योगिक विकास नहीं किया है. न तो एमपी फंड आवंटित किया और न ही केंद्र सरकार की कोई योजना लायी. प्रदर्शनकारियों ने कहा, अगर वह काम नहीं करना चाहते, तो उन्हें अपना इस्तीफा दे देना चाहिए.

पहले भी लग चुके हैं लापता के पोस्टर

यह पहली बार नहीं हुआ, जब पठानकोट में बॉलीवुड अभिनेता सनी देओल लापता को लेकर पोस्टर लगाया गया है. बल्कि इससे पहले भी ऐसा कि पोस्टर पंजाब में लगाया गया था.

2019 के लोकसभा चुनाव में मिली थी सनी देओल को जबरदस्त जीत

मालूम हो सनी देओल राजनीति में कदम रखते ही धमाका कर दिया. उन्होंने 2019 का लोकसभा चुनाव पंजाब के गुरदासपुर सीट से चुनाव लड़ा था. जिसमें उन्होंने कांग्रेस के सुनील जाखड़ को शिकस्त देकर शानदार जीत दर्ज की और पहली बार लोकसभा पहुंचे. सनी देओल ने जाखड़ को 82459 मतों से हराया था.

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By Arbindkumar mishra

अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.

झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.

करियर का सफरनामा

अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग

खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:

34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.

पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.

पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.

शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)

UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.

बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.

एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.

लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.

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