Biotech: विज्ञान और विरासत एक दूसरे के पूरक
गुजरात बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च सेंटर की बीएसएल-4 बायो-कंटेनमेंट फैसिलिटी, रिसर्च-बेस्ड परमानेंट सुरक्षा की सभी जरूरतों को पूरा करेगा. वैज्ञानिकों को खतरनाक वायरस के सैंपल जांचने के लिए विदेश पर निर्भरता खत्म होगी और जांच में तेजी आएगी. पुणे की वायरोलॉजी इंस्टीट्यूट के बाद यह भारत की दूसरी उच्च स्तरीय लैब होगी.
Biotech: पशुओं से लोगों तक अधिकांश रोग पहुंचता है. एक अध्ययन के अनुसार 60 से 70 फीसदी बीमारियां पशुओं से होकर इंसान तक पहुंचती हैं. इसलिए भारत ने वन हेल्थ मिशन के जरिये मानव और पशु दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का कार्यक्रम शुरू किया है. केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को गांधीनगर में गुजरात बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च सेंटर की बीएसएल-4 बायो-कंटेनमेंट फैसिलिटी का शिलान्यास करते हुए कहा कि हमारे वैज्ञानिकों को खतरनाक वायरस के सैंपल जांचने के लिए विदेश पर निर्भरता खत्म होगी और जांच में तेजी आएगी. बीएसएल-4 सभी सुविधाओं को पूरा करेगा और रिसर्च-बेस्ड परमानेंट सुरक्षा की सभी जरूरतों को पूरा करेगा. उन्होंने कहा कि पुणे की वायरोलॉजी इंस्टीट्यूट के बाद यह भारत की दूसरी उच्च स्तरीय लैब होगी. लेकिन किसी राज्य सरकार द्वारा बनाई जा रही यह पहली लैब है.
जैविक सुरक्षा का मजबूत किला
एक विशाल कॉम्प्लेक्स में 362 करोड़ रुपये की लागत से 11 हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में देश की जैविक सुरक्षा का एक मजबूत किला बनने जा रहा है. बीएसएल-4 बायो-कंटेनमेंट फैसिलिटी से बायो-टेक्नोलॉजी क्षेत्र में काम करने वाले युवाओं को नये मौके मिलेंगे. यह सुविधा वैज्ञानिकों को अत्यंत संक्रामक और घातक वायरस पर एक सुरक्षित वातावरण में शोध करने का प्लेटफार्म उपलब्ध कराएगी. खास बात है कि दुनिया की बीएसएल लैब का अध्ययन करके बीएसएल-4 बायो-कंटेनमेंट फैसिलिटी तैयार की जा रही है.
पिछले एक दशक में बायोटेक्नोलॉजी का तेजी से हुआ है विकास
गृह मंत्री ने कहा कि पिछले 11 साल में बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में अभूतपूर्व विकास हुआ है. वर्ष 2014 में भारत की बायो इकोनॉमी 10 बिलियन डॉलर की थी और वर्ष 2024 का वित्त वर्ष समाप्त होने पर यह 166 बिलियन डॉलर तक हो गयी. पिछले 10 साल में इस क्षेत्र में 17 गुना विकास यह बताता है कि भारत के युवा और उद्योगपति बायो इकोनॉमी के क्षेत्र में बड़ी सफलता हासिल कर सकते हैं. यही नहीं वर्ष 2014 में बायोटेक क्षेत्र में काम करने वाले स्टार्टअप्स की संख्या 500 से कम थी, जो वर्ष 2025 में बढ़कर 10 हजार से अधिक हो चुकी है.
बायो इनक्यूबेटर वर्ष 2014 में 6 थे, जो वर्ष 2025 में 95 हो चुके हैं. पहले बाजार में केवल कुछ उत्पाद थे, अब 800 से अधिक हो गयी है. उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र का भविष्य, देश में क्षमता और देश के युवाओं की उसमें रुचि देखनी हो तो पेटेंट फाइलिंग इसका अच्छा पैमाना है. वर्ष 2014 में इस क्षेत्र में भारत के 125 पेटेंट फाइल हुए थे और 2025 में हम 1300 तक पहुंच चुके हैं.
सबसे बड़ा वैक्सीन निर्माता देश है भारत
भारत दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीन निर्माता देश है. विश्व की 60 फीसदी वैक्सीन भारत में बनती हैं. सर्वाइकल कैंसर की पहली स्वदेशी वैक्सीन सर्वावैक और कोरोना की विश्व की पहली डीएनए आधारित वैक्सीन भारत में बनी. भारत सरकार ने बायोई-3 नीति (इकोनॉमी, एनवायरनमेंट और एम्प्लॉयमेंट) लागू करके बायोटेक को बढ़ावा देने का फैसला लिया.
गृह मंत्री ने कहा कि एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति विकसित हो रही प्रतिरोधकता समाज और पूरी मानव जाति के लिए बड़ा खतरा है. यह एक ‘साइलेंट डिजास्टर’ की तरह है. हमारा लक्ष्य संक्रमण को रोकना और एंटीबायोटिक्स को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित बनाना होना चाहिए. विकास और विज्ञान विरासत के खिलाफ नहीं हैं, दोनों देश की जनता की जरूरतें हैं, दोनों एक साथ चल सकते हैं.
