LGBTQ समुदाय की पहली राज्यसभा सदस्य बनेंगी मेनका गुरुस्वामी, बंगाल से टीएमसी के ये हैं 4 उम्मीदवार

पश्चिम बंगाल की 5 राज्यसभा सीटों के लिए मार्च में होने वाले चुनावों के लिए तृणमूल कांग्रेस ने अपने 4 उम्मीदवारों की घोषणा कर दी. माना जा रहा है कि उसके सभी चार उम्मीदवार, जिसमें एलजीबीटीक्यू समुदाय की मेनका गुरुस्वामी भी शामिल हैं, की जीत सुनिश्चित है. एक सीट भाजपा के खाते में जा सकता है. हालांकि, बीजेपी ने अभी अपने उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है.

एलजीबीटीक्यू समुदाय की पहली सदस्य राज्यसभा सांसद बनने जा रहीं हैं. जी हां, मेनका गुरुस्वामी को तृणमूल कांग्रेस ने राज्यसभा चुनाव 2026 के लिए अपना उम्मीदवार घोषित किया है. मेनका के अलावा ममता बनर्जी के बेहद करीबी आईपीएस अधिकारी राजीव कुमार भी उच्च सदन के सदस्य बनेंगे. फिल्म इंडस्ट्री की 2 हस्तियों बाबुल सुप्रियो और कोयल मल्लिक को भी टीएमसी ने राज्यसभा भेजने का ऐलान कर दिया है.

ममता बनर्जी के करीबी आईपीएस अधिकारी राजीव कुमार

राजीव कुमार पश्चिम बंगाल कैडर के 1989 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के अधिकारी हैं. वे कोलकाता पुलिस आयुक्त रहने के बाद जुलाई 2024 से 31 जनवरी 2026 तक पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक रहे. रिटायर्ड आईपीएस ऑफिसर राजीव कुमार अपने कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण और चर्चित मामलों के कारण राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहे. ममता बनर्जी के बेहद करीबी पुलिस अफसर राजीव कुमार को तृणमूल कांग्रेस ने राज्यसभा के लिए नामित किया है.

रंजीत मल्लिक की बेटी कोयल मल्लिक जायेंगी राज्यसभा

कोयल मल्लिक बंगाली फिल्म उद्योग की जानी-मानी अभिनेत्री हैं. उन्होंने कई सफल फिल्मों में काम किया है. पश्चिम बंगाल में उनके प्रशंसकों का एक बड़ा दर्शक वर्ग है. वह प्रख्यात अभिनेता रंजीत मल्लिक की पुत्री हैं. लंबे समय से मनोरंजन जगत में सक्रिय हैं.

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लोकसभा और विधानसभा के बाद अब राज्यसभा में बाबुल

गायक से राजनेता बने बाबुल सुप्रियो प्रमुख सार्वजनिक व्यक्तित्व हैं। वे हिंदी और बंगाली फिल्मों में पार्श्वगायन के लिए जाने जाते हैं और बाद में सक्रिय राजनीति में आए। वे लोकसभा सांसद रह चुके हैं तथा केंद्र सरकार में मंत्री पद भी संभाल चुके हैं। वर्तमान में वे पश्चिम बंगाल की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

LGBTQ समुदाय की पहली राज्यसभा सदस्य बनेंगी मेनका

मेनका गुरुस्वामी LGBTQ कम्युनिटी की सदस्य हैं. पहली बार किसी पार्टी ने इस समुदाय के सदस्य को राज्यसभा का सांसद मनोनीत किया है. मेनका गुरुस्वामी सुप्रीम कोर्ट की सीनियर एडवोकेट हैं. वह संवैधानिक मामलों की विशेषज्ञ हैं. वर्ष 2018 में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 377 को निरस्त कराने वाले ऐतिहासिक फैसले में याचिकाकर्ताओं की वकील थीं. नागरिक अधिकारों और संवैधानिक मूल्यों से जुड़े केस की पैरवी करतीं हैं.

राज्यसभा में तृणमूल के 12 सांसद, 3 मुस्लिम

राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस के 12 सांसद हैं. इनमें 3 पत्रकार, 2 वकील, एक धार्मिक नेता, 2 ट्रेड यूनियन नेता, एक टी गार्डेन नेता, एक राजनेता और एक आरटीआई एक्टिविस्ट हैं. इन सांसदों में 1 एंग्लो इंडियन, एक कायस्थ, 2 मुस्लिम, एक कायस्थ, एक आदिवासी, एक नामशूद्र और बाकी सामान्य वर्ग के लोग हैं.

सांसद का नामपेशाजाति/धर्म/वर्ग
डेरेक ओब्रायनक्विजमास्टर और पत्रकारएंग्लो इंडियन (ईसाई)
सागरिका घोषपत्रकार और लेखककायस्थ
मो नदीमुल हकपत्रकारमुस्लिम
सुखेंदु शेखर रायवकीलसामान्य
सुष्मिता देववकीलसामान्य
ममता बाला ठाकुरधार्मिक नेता (मतुआ)नामशूद्र
डोला सेनट्रेड यूनियन नेतासामान्य
साकेत गोखलेआरटीआई एक्टिविस्टसामान्य
समीरुल इस्लामप्रोफेसरमुस्लिम
प्रकाश चिक बड़ाईकटी गार्डेन लीडरआदिवासी
रीतब्रत बनर्जीट्रेड यूनियन नेताब्राह्मण

बंगाल के इन सांसदों की सीटें हो रहीं खाली

  • साकेत गोखले (तृणमूल कांग्रेस)
  • रीतब्रत बनर्जी (तृणमूल कांग्रेस)
  • विकास रंजन भट्टाचार्य (लेफ्ट फ्रंट)
  • सुब्रत बक्शी (तृणमूल कांग्रेस)

तृणमूल कांग्रेस छोड़ चुकीं हैं मौसम नूर

तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सांसद मौसम नूर ने पिछले दिनों पार्टी और राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था. उन्होंने टीएमसी छोड़ कांग्रेस का दामन थाम लिया था. उनके इस्तीफे के पहले राज्यसभा में तृणमूल के मुस्लिम सांसदों की संख्या 3 थी.

टीएमसी ने घोषित किये 4 उम्मीदवार, भाजपा प्रत्याशी तय नहीं

पश्चिम बंगाल में राज्यसभा की 5 सीटें खाली हुई हैं. राज्य में कुल 294 विधानसभा सीटें हैं. इस लिहाज से राज्यसभा के एक सदस्य को जीतने के लिए कम से कम 59 वोट की जरूरत पड़ेगी. भारतीय जनता पार्टी के 60 से अधिक विधायक हैं. इसलिए उसके एक उम्मीदवार की जीत तय है. हालांकि, अब तक बीजेपी ने अपने उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है. उधर, तृणमूल कांग्रेस ने 4 उम्मीदवार उतार दिये हैं. विधानसभा में उसके 223-225 सदस्य हैं.

राज्यसभा चुनाव 2026 का पूरा कार्यक्रम

चुनाव से जुड़े विवरणतारीख
अधिसूचना जारी करने की तारीख26 फरवरी 2026 (बृहस्पतिवार)
नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख5 मार्च 2026 (बृहस्पतिवार)
नामांकन पत्रों की जांच6 मार्च 2026 (शुक्रवार)
नाम वापस लेने की आखिरी तारीख9 मार्च 2026 (सोमवार)
मतदान की तारीख16 मार्च 2026 (सोमवार)
कब से कब तक होगा मतदानसुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक
वोटों की गिनती16 मार्च 2026 (सोमवार) शाम 5 बजे
वोटिंग की प्रक्रिया कब होगी संपन्न20 मार्च 2026 (शुक्रवार)

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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