Tribal: भारत जनजाति महोत्सव और 24 मार्च को सीएसआर समिट का आयोजन होगा.

आदिवासी कला, संगीत, विरासत और उद्यमिता को बढ़ावा देने लिए आयोजित होगा कई कार्यक्रम केंद्रीय जनजाति मामलों के मंत्रालय की ओर से 2-13 मार्च तक ट्राइब्स आर्ट फेस्ट, 13-15 मार्च को लिविंग रूट्स फेस्टिवल-साउंडस्केप्स ऑफ ट्राइबल इंडिया, 18-30 मार्च के बीच भारत ट्राइब्स फेस्ट,

Tribal: आदिवासी समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, क्रिएटिव क्षमता का प्रदर्शन, उद्यमिता का विकास, बाजार तक पहुंच सुनिश्चित करने और सतत आदिवासी विकास के लिए कॉरपोरेट के साथ साझेदारी बढ़ाने के लिए मार्च महीने में राष्ट्रीय स्तर पर कई आयोजन होने जा रहा है. इस कड़ी में केंद्रीय जनजाति मामलों के मंत्रालय की ओर से 2-13 मार्च तक ट्राइब्स आर्ट फेस्ट, 13-15 मार्च को लिविंग रूट्स फेस्टिवल-साउंडस्केप्स ऑफ ट्राइबल इंडिया, 18-30 मार्च के बीच भारत ट्राइब्स फेस्ट, भारत जनजाति महोत्सव और 24 मार्च को सीएसआर समिट का आयोजन करने जा रहा है. शनिवार को केंद्रीय जनजाति मामलों के मंत्री जुएल उरांव में इन आयोजनों का “लोगो’ जारी किया. टाइब्स आर्ट फेस्ट में 70 से अधिक प्रतिष्ठित आदिवासी कलाकार 30 जनजाति कला का लगभग एक हजार कलाकृति का प्रदर्शन करेंगे. इसका मकसद समावेशी विकास, सांस्कृतिक संरक्षण और आर्थिक सशक्तिकरण के जरिये जनजाति समुदाय की पहचान, गरिमा और आजीविका के लिए अवसर मुहैया कराना है.

जनजातीय कला का होगा प्रदर्शन 

इस दौरान वारली, डोकरा, भील, बोडो, कोया और प्रमुख जनजाति कला का प्रदर्शन होगा. कार्यक्रम के दौरान वाॅकथ्रू, मेंटरशिप, वर्कशॉप, पैनल डिस्कशन, लाइव प्रदर्शन भी होगा. लिविंग रूट्स फेस्टिवल-साउंडस्केप्स ऑफ ट्राइबल इंडिया के जरिये आदिवासियों की प्राचीन प्रकृति, ऋतु चक्र परंपरा और संगीत का प्रदर्शन करना है. इस आयोजन का मकसद जनजाति संगीत को उसकी मौलिकता और सामुदायिक जड़ों के साथ प्रस्तुत कर कलाकार काे सम्मानित करना और आर्थिक ताैर पर सशक्त बनाना है. आयोजन के दौरान हर शाम कर्तव्य पथ पर एक भव्य संगीत कार्यक्रम का आयोजन होगा. तीन दिन में 15 प्रस्तुतियों का प्रदर्शन किया जाएगा, जिसमें देश के विभिन्न क्षेत्रों की झलक देखने को मिलेगी.

इसके अलावा भारत जनजाति महोत्सव में देश के विभिन्न हिस्सों से आए एक हजार से अधिक जनजाति कारीगर, शिल्पकार, रसोइये, सांस्कृतिक मंडलियां, जनजाति कला, शिल्प, व्यंजन, नृत्य और संगीत का प्रदर्शन किया जाएगा. इसमें 22 राज्यों के 78 वन धन विकास केंद्र, 310 कलाकार, 30 खानपान के स्टॉल सहित कई तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन होगा. इसमें फिजी, आस्ट्रेलिया, वियतनाम सहित कई देशों के जनजाति कारीगर भी अपने उत्पाद का प्रदर्शन करेंगे. वहीं सीएसआर समिट का मकसद जनजाति उद्यमिता को बढ़ावा देकर जनजाति उत्पादों की पहुंच घरेलू और विदेशी बाजार तक पहुंचाने के तरीके पर विचार करना है. इस दौरान इनोवेशन, कौशल विकास और अन्य मुद्दों पर वर्कशॉप का आयोजन किया जाएगा. 

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Published by: Vinay Tiwari

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.

Read More

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >