भारतीय वायुसेना में भावना कंठ ने रचा इतिहास, बनीं पहली महिला फाइटर कॉम्बैट लीडर

स्क्वाड्रन लीडर भावना कंठ ने भारतीय वायुसेना में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है. वह फाइटर कॉम्बैट लीडर (FCL) के रूप में योग्य होने वाली पहली महिला अधिकारी बन गई हैं. यह उपलब्धि वायुसेना में महिलाओं की बढ़ती भूमिका का प्रतीक है.

Bhawana Kanth : भारतीय वायुसेना ने एक और बड़ी उपलबिधि अपने नाम की है. स्क्वाड्रन लीडर भावना कंठ ने ऐसा इतिहास रचा है, जो देश की महिला सैन्य अधिकारियों के लिए एक मिसाल बन गई हैं. वह फाइटर कॉम्बैट लीडर (FCL) के तौर पर क्वालिफाई करने वाली भारतीय वायुसेना की पहली महिला ऑफिसर बन गई हैं. यह उपलब्धि उन्होंने ग्वालियर स्थित टैक्टिक्स एंड एयर कॉम्बैट डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (TACDE) में हासिल की. फाइटर कॉम्बैट लीडर की भूमिका लड़ाकू विमानों से जुड़े अभियानों और हवाई युद्ध की रणनीति में बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है.

TACDE में हासिल की अहम योग्यता

Fighter Combat Leader की योग्यता लड़ाकू अभियानों से जुड़ी रणनीति और हवाई युद्धकौशल के क्षेत्र में महत्वपूर्ण मानी जाती है. भावना कंठ का इस स्तर की ट्रेनिंग और क्वालिफिकेशन हासिल करना भारतीय वायुसेना में महिलाओं की बढ़ती भूमिका को भी दिखाता है. TACDE भारतीय वायुसेना में टैक्टिक्स और एयर कॉम्बैट से जुड़ी ट्रेनिंग के लिए एक महत्वपूर्ण संस्थान है.

वायुसेना में महिलाओं की बढ़ती भूमिका

भावना कंठ की यह उपलब्धि भारतीय वायुसेना में महिला अधिकारियों की बढ़ती जिम्मेदारियों और उनकी पेशेवर क्षमता को रेखांकित करती है. FCL के रूप में क्वालिफाई करने वाली पहली महिला अधिकारी बनकर उन्होंने लड़ाकू विमानन और एयर कॉम्बैट के क्षेत्र में एक नया मील का पत्थर स्थापित किया है. उनकी उपलब्धि को भारतीय वायुसेना ने भी विशेष रूप से रेखांकित किया है.

भावना कंठ पहले भी रच चुकी हैं इतिहास

भावना कंठ भारतीय वायुसेना की उन महिला अधिकारियों में शामिल हैं, जिन्होंने लड़ाकू विमान उड़ाने के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई है. वह देश की पहली महिला फाइटर पायलटों में शामिल रही हैं और इससे पहले भी कई अहम उपलब्धियां हासिल कर चुकी हैं. ऐसे में फाइटर कॉम्बैट लीडर की योग्यता हासिल करना उनके करियर की एक और बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है.

FCL बनने का क्या मतलब है?

आप आम भाषा में यह भी समझा सकते हैं कि फाइटर कॉम्बैट लीडर केवल लड़ाकू विमान उड़ाने तक सीमित भूमिका नहीं है. इसमें हवाई युद्ध की रणनीति, मिशन की योजना और कॉम्बैट ऑपरेशन के दौरान बेहतर फैसले लेने जैसी क्षमताएं महत्वपूर्ण होती हैं. इसलिए इस स्तर की योग्यता हासिल करना किसी फाइटर पायलट के लिए काफी अहम माना जाता है.

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By आलोक पाठक

आलोक पाठक वर्ष 2019 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अपने पत्रकारिता सफर के दौरान वे खबर मंत्र, गांडीव और नक्षत्र न्यूज़ जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं। वर्तमान में वे प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। हिंदी भाषा और लेखन के प्रति उनका विशेष लगाव है। उन्हें भू-राजनीति (Geopolitics) और राष्ट्रीय राजनीति से जुड़े विषयों पर लिखना पसंद है। निजी जीवन में कहानियां और कविताएं लिखना तथा कालजयी साहित्य का अध्ययन उनकी प्रमुख रुचियों में शामिल है। उनका प्रयास तथ्यों पर आधारित, सरल और प्रभावी लेखन के माध्यम से पाठकों तक सार्थक जानकारी पहुंचाना है।

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