छात्रा आकृति चौधरी की NSA हिरासत गैरकानूनी, HC ने यूपी सरकार पर ठोका 5 लाख का जुर्माना

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने छात्रा आकृति चौधरी की NSA के तहत हिरासत को अवैध करार दिया है. कोर्ट ने इस मामले में यूपी सरकार पर 5 लाख रुपये का भारी जुर्माना भी लगाया है. यह फैसला छात्रों और कार्यकर्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण जीत है.

नोएडा की 25 वर्षीय छात्रा आकृति चौधरी को मजदूर आंदोलन के मामले में हिरासत में ले लिया गया था. बुधवार (2 सितंबर) को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उसकी गिरफ्तारी को मनमाना करार दिया है. आकृति को नेशनल सिक्योरिटी एक्ट के तहत हिरासत में लिया गया था.

11 अप्रैल को हुई थी गिरफ्तारी

आकृति पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर की रहने वाली हैं, जो ग्रेजुएशन की पढ़ाई दिल्ली यूनिवर्सिटी से कर रही हैं. उन्हें 11 अप्रैल को हिरासत में लिया गया था. इसके बाद 13 मई को उनपर सरकार ने एनएसए लागू कर दिया था. तब से वह गौतम बुद्ध नगर स्थित कसना जेल में बंद थी.

जज अतुल श्रीधरन और अचल सचदेव की बेंच ने आकृति चौधरी की हिरासत को रद्द करने का फैसला सुनाया है. राज्य की ओर से सरकारी अधिवक्ता नितेश कुमार श्रीवास्तव ने इसकी पुष्टि की है. लेकिन उन्होंने मामले को लेकर अन्य कोई टिप्पणी नहीं की है.

क्या थी गिरफ्तारी की वजह?

दिल्ली यूनिवर्सिटी की पूर्व छात्रा और सामाजिक कार्यकर्ता आकृति चौधरी को अप्रैल 2026 में नोएडा में हुए हिंसक मजदूर प्रदर्शन के मामले में पुलिस ने गिरफ्तार किया था. यूपी पुलिस का आरोप था कि वह 'मजदूर बिगुल दस्ता' से जुड़ी हैं और उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए मजदूरों को हिंसा, पथराव और आगजनी के लिए उकसाया. इसके अलावा उन पर इस आंदोलन के लिए विदेशी फंडिंग हासिल करने के भी आरोप लगाए गए थे, जिसके चलते प्रशासन ने उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत सख्त कार्रवाई की थी.

अधिकारियों से वसूला जाएगा 5 लाख का जुर्माना

हाईकोर्ट ने एक मामले में हिरासत को गैरकानूनी मानते हुए राज्य पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. चौधरी के वकीलों के अनुसार, यह रकम डीएम से लेकर एसएचओ तक के जिम्मेदार अफसरों से वसूली जाएगी. पुलिस ने साजिश का आरोप लगाया था, जबकि बचाव पक्ष ने साफ किया कि वहां सिर्फ गरीब बच्चों की लाइब्रेरी का उद्घाटन हुआ था.

गंभीर आरोप और 11 FIR दर्ज

पुलिस और यूपी सरकार का दावा है कि चौधरी हिंसक सोच रखने वाले गिरोह से जुड़ी थीं और दिल्ली के करावल नगर की एक लाइब्रेरी से आंदोलन की साजिश रच रही थीं. उन पर एनएसए (NSA) के साथ हत्या के प्रयास और साजिश जैसी 11 एफआईआर दर्ज हैं. वकील के मुताबिक, 5 मामलों में जमानत मिल चुकी है, जबकि 6 की सुनवाई बाकी है.

'बेटी गरीबों के लिए लड़ी और जीती'

आकृति के पिता अरुण चौधरी ने कहा कि उन्हें अपनी बेटी पर पूरा भरोसा था कि उसने कुछ गलत नहीं किया. वह गरीबों के हक के लिए लड़ती रही है और आगे भी लड़ेगी. उन्हें अदालत पर पूरा विश्वास था और आज आखिरकार उनकी बेटी की जीत हुई है.


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By आलोक पाठक

आलोक पाठक वर्ष 2019 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अपने पत्रकारिता सफर के दौरान वे खबर मंत्र, गांडीव और नक्षत्र न्यूज़ जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं। वर्तमान में वे प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। हिंदी भाषा और लेखन के प्रति उनका विशेष लगाव है। उन्हें भू-राजनीति (Geopolitics) और राष्ट्रीय राजनीति से जुड़े विषयों पर लिखना पसंद है। निजी जीवन में कहानियां और कविताएं लिखना तथा कालजयी साहित्य का अध्ययन उनकी प्रमुख रुचियों में शामिल है। उनका प्रयास तथ्यों पर आधारित, सरल और प्रभावी लेखन के माध्यम से पाठकों तक सार्थक जानकारी पहुंचाना है।

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