अजीत जोगी का निधन, जानिए मैकनिकल इंजीनियर से दिग्गज राजनेता तक का सफर

छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेता अजीत जोगी का निधन हो गया. वे 74 वर्ष के थे और कुछ समय से अस्पताल में भरती थे. वे वर्ष 2000 से 2003 तक छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रहे थे.

छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री और दिग्गज राजनेता अजीत जोगी का आज निधन हो गया. वे 74 वर्ष के थे और कुछ समय से अस्पताल में भरती थे. वे वर्ष 2000 से 2003 तक छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रहे थे.

अजीत जोगी का निधन दोपहर लगभग 3.30 बजे हुआ. उनके निधन की सूचना श्री नारायणा अस्पताल के प्रबंध निदेशक डॉक्टर सुनील खेमका ने दी, वे मई के पहले सप्ताह से इस अस्पताल में भरती थे. अजीत जोगी के परिवार में उनकी पत्नी रेणु जोगी और पुत्र अमित जोगी हैं.

अजीत जोगी मैकनिकल इंजीनियर थे और उन्होंने मौलाना आजाद कॉलेज से पढ़ाई की थी. वे एनआईटी रायपुर में लेक्चरर भी रहे थे. उसके बाद उनका चयन भारतीय पुलिस सेवा और भारतीय प्रशासनिक सेवा में हुआ. 1986-87 में वे प्रशासनिक सेवा छोड़कर राजनीति में आ गये. वे दो बार राज्यसभा के सदस्य भी रहे.

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वे वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री बने और 2003 तक इस पद पर रहे. बाद में अजीत जोगी का कांग्रेस से मोहभंग हो गया और 2016 में अजीत जोगी ने नयी पार्टी जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) का गठन किया.

अविभाजित मध्यप्रदेश के पेंड्रा में अजीत जोगी का जन्म हुआ था. कहा जाता है कि अजीत जोगी दिग्गज कांग्रेस नेता अर्जुन सिंह की सलाह पर राजनीति में आये थे. कांग्रेस ने उनपर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल रहने का आरोप लगाकर पार्टीे से निकाल दिया था.

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रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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