ई-फार्मेसी ऑपरेशन और भारी डिस्काउंट के विरोध में 20 मई को देशभर में दवा दुकानें बंद

AIOCD : देश भर में दवा दुकानें बंद हैं, जिसकी वजह मरीजों को 24 घंटे तक दवाइयां नहीं मिलेंगी. दवाओं की ऑनलाइन ब्रिकी के विरोध में दवा विक्रेताओं ने हड़ताल की है.

AIOCD : ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) के आह्ववान पर बुधवार को देश भर में दवा दुकानें बंद रहेंगी, जिसकी वजह से मरीजों को 24 घंटे तक दवाएं नहीं मिलेंगी. AIOCD ने 24 घंटे की यह हड़ताल ई-फार्मेसी ऑपरेशन, भारी डिस्काउंट और डॉक्टर की लिखी दवाओं की बिना वेरिफ़ाई की ऑनलाइन बिक्री के विरोध में की है. इस हड़ताल की वजह से देशभर में मेडिकल दुकानें और फार्मेसी बंद हैं.

दवा विक्रेताओं की हड़ताल का असर

दवा विक्रेताओं की हड़ताल का असर पूरे देश में दिख रहा है. देश के लगभग सभी शहरों में ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स के आह्वान पर दवा दुकानें बंद हैं. दवा दुकानों के बंद रहने की वजह से मरीजों को परेशानी हो रही है.

तेलंगाना में पब्लिक एडवाइजरी जारी

ड्रग्स कंट्रोल एडमिनिस्ट्रेशन (DCA) ने तेलंगाना में मंगलवार को एक पब्लिक एडवाइजरी जारी की ताकि बुधवार को ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) द्वारा बुलाए गए एक दिन के देशव्यापी बंद के दौरान दवाओं की बिना रुकावट उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके. DCA के मुताबिक, मरीजों के हितों की रक्षा करने और पूरे राज्य में जरूरी दवाओं तक पहुंच में रुकावट से बचने के लिए AIOCD के तेलंगाना चैप्टर के साथ एक मीटिंग की गई. एडवाइजरी के मुताबिक, इमरजेंसी और रेगुलर मेडिकल जरूरतों को पूरा करने के लिए अस्पतालों से जुड़े फार्मेसी स्टोर बंद के दौरान चालू रहेंगे. AIOCD के डिस्ट्रिक्ट चैप्टर को भी इमरजेंसी में लोकल मेडिकल स्टोर से दवाइयों की उपलब्धता पक्का करने के लिए ड्रग इंस्पेक्टर के साथ मिलकर काम करने का निर्देश दिया गया है.

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By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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