लॉकडाउन में बुजुर्गों के साथ दुर्व्यवहार बढ़ा, 35 प्रतिशत से अधिक हुए घरेलू हिंसा का शिकार, 58 प्रतिशत उपेक्षा के शिकार

कोरोना वायरस के प्रकोप ने पूरे देश को बुरी तरह प्रभावित किया है. कई बच्चे अनाथ हो गये तो कइयों ने अपने माता-पिता में से किसी एक को खो दिया. कोरोना काल में लगाये गये लॉकडाउन का असर गरीबों पर तो पड़ा ही, बुजुर्ग भी इससे प्रभावित हुए हैं.

कोरोना वायरस के प्रकोप ने पूरे देश को बुरी तरह प्रभावित किया है. कई बच्चे अनाथ हो गये तो कइयों ने अपने माता-पिता में से किसी एक को खो दिया. कोरोना काल में लगाये गये लॉकडाउन का असर गरीबों पर तो पड़ा ही, बुजुर्ग भी इससे प्रभावित हुए हैं.

हिंदुस्तान टाइम्स में छपी एजवेल फाउंडेशन द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, कम से कम 73% बुजुर्गों के साथ कोरोना काल में दुर्व्यवहार हुआ है. इस सर्वे में लगभग 5,000 बुजुर्गों से प्रतिक्रियाएं ली गयी थी. इस बातचीत में लगभग 82 प्रतिशत लोगों ने यह माना कि उनका जीवन लॉकडाउन के दौरान प्रभावित हुआ है.

बुजुर्गों ने यह माना कि लॉकडाउन के दौरान उनके साथ दुर्व्यवहार के मामले बढ़े. 61 प्रतिशत लोगों ने यह दावा किया कि दुर्व्यवहार का कारण पारस्परिक संबंध थे. 65 प्रतिशत ने यह माना कि वे उपेक्षा के शिकार हुए. जबकि 58 प्रतिशत बुजुर्गों ने दुर्व्यवहार की बात कही. वहीं 35.1 प्रतिशत बुजुर्गों को घरेलू हिंसा का शिकार होना पड़ा.

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अधिकांश बुजुर्गों को पारिवारिक देखभाल पर निर्भर रहना पड़ता है जिसके कारण वे कमजोर साबित होते हैं. खराब वित्तीय स्थिते के कारण बुजुर्ग महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार ज्यादा होता है. उनकी परिवार के प्रति निर्भरता ज्यादा होती और उनकी आयु भी लंबी होती है.

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पिछले साल लगे लॉकडाउन में ऐसी रिपोर्ट सामने आयी थी जिसमें यह कहा गया था कि महिलाओं के साथ घरेलू हिंसा की घटनाएं बहुत बढ़ी हैं, महिला आयोग के पास भी कई तरह की शिकायतें पहुंची थीं.

Posted By : Rajneesh Anand

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