VIDEO: आइएसआइएस के चंगुल से छूटे राममूर्ति ने सुनाई आपबीती कहा- मुझे मारी गई तीन गोली और...

नयी दिल्ली : लीबिया में एक डॉक्टर समेत 6 भारतीयों को आतंकी संगठन आइएसआइएस ने बंधक बनाया था. इन सभी को कुछ दिन पहले ही भारत ने काफी मशक्कत के बाद छुड़ाया. इनमें एक डॉक्टर डॉ. राममूर्ति कोसानम ने भारत पहुंचकर अपनी व्यथा सुनाई. उन्होंने सबसे पहले छुडाये जाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एनएसए […]

नयी दिल्ली : लीबिया में एक डॉक्टर समेत 6 भारतीयों को आतंकी संगठन आइएसआइएस ने बंधक बनाया था. इन सभी को कुछ दिन पहले ही भारत ने काफी मशक्कत के बाद छुड़ाया. इनमें एक डॉक्टर डॉ. राममूर्ति कोसानम ने भारत पहुंचकर अपनी व्यथा सुनाई. उन्होंने सबसे पहले छुडाये जाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एनएसए का आभार जताया.

डॉ. राममूर्ति ने बताया कि आइएसआइएस के आतंकियों ने उन्हें 3 बार गोली मारी और काफी भला बुरा भी कहा. आपबीती सुनाते हुए उन्होंने कहा कि आतंकियों ने मुझे ऑपरेशन थिएटर में जाकर सर्जरी करने और टांके लगाने के लिए जबरदस्ती की लेकिन मैंने कभी ऐसा नहीं किया. आतंकियों ने कभी मुझे मारा पीटा नहीं लेकिन वे गाली देते थे. वे पढ़े-लिखे थे और भारत के बारे में अच्छी तरह से जानते हैं.

उन्होंने कहा कि एक दिन आइएसआइएस के लोग मेरे पास आए और अपने साथ आने को कहा. इसके बाद एक अन्य भारतीय के साथ मुझे अपनी सेंट्रल जेल ले गए. जेल में मैं दो अन्य भारतीयों से मिला. उन्हें भी पकड़ लिया गया था और वे दो महीने से जेल में ही थे. आतंकियों ने मुझे वीडियो दिखाए जिसमें दिखाया गया था कि उन्होंने ईराक, सीरिया और नाइजीरिया में क्या किया. यह देखना बहुत मुश्किल था.

आगे उन्होंने कहा कि इसके बाद वहां लोगों ने नमाज पढ़नी सिखाई और वजू करना सिखाया. दो महीने तक यही चलता रहा. इसके बाद वे पता नहीं क्यों मुझे एक अंडरग्राउंड जेल में ले गए. वहां मैं तुर्की लोगों से मिला. वहां असइएसआइएस के लोगों ने इस्लाम के बारे में और नियमों के बारे में बताया. इसके बाद वे पता नहीं क्यों मुझसे डरकर आतंकियों ने मुझे कई जेलों में शिफ्ट किया.

उन्होंने कहा कि रमजान के समय कुछ आतंकियों ने मुझसे मदद मांगी. मैंने इनकार कर दिया, लेकिन वे जबरदस्ती मुझे ले गए. जब मैं कैंप में काम कर रहा था तब 10 दिन के भीतर मुझे तीन बार गोली मारी गई. बाएं हाथ और दोनों पैरों में गोलियां लगीं.

राममूर्ति ने बताया कि एक दिन जब सेना उसी बिल्डिंग के पास पहुंची, जहां हमें रखा गया था तो हमने चिल्लाना शुरू किया. फिर मुझे बचा लिया गया. उन्होंने बताया कि आइएसआइएस के लोग सूइसाइड बेल्ट लगाकर रखते हैं, जिससे लगभग 100 लोग मारे जा सकते हैं.

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