एससी-एसटी अत्याचार निवारण संशोधन विधेयक 2014 को लोकसभा की मंजूरी

नयी दिल्ली : लोकसभा ने आज अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण संशोधन विधेयक 2014 को मंजूरी प्रदान कर दी. विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत ने कहा कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोगों पर अत्याचार को रोकने के लिए उस दिशा में […]

नयी दिल्ली : लोकसभा ने आज अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण संशोधन विधेयक 2014 को मंजूरी प्रदान कर दी. विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत ने कहा कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोगों पर अत्याचार को रोकने के लिए उस दिशा में अनेक पहल की गई है, यह उसी दिशा में एक और कडी है. उन्होंने कहा कि ऐसी ही एक पहल सिर पर मैला ढोने पर रोक के संबंध में की गई. गहलोत ने कहा कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित रिक्त पदों को भरने के लिए विशेष अभियान चलाने की पहल की जा रही है.

इस विधेयक के माध्यम से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण कानून 1989 को मजबूत बनाने की पहल की गई है. इसमें कई तरह के कार्यो को नयी श्रेणी में अपराध की दायरे में लाया गया है. विधेयक में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों के कल्याण से संबंधित कार्यो के संदर्भ में अपने कर्तव्य का निर्वाह करने में लापरवाही बरतने वाले लोक सेवकों के लिए दंड का प्रावधान किया गया है.

इसमें जिला स्तर पर विशेष अदालत गठित करने की बात कही गई है जिसमें इसके लिए विशिष्ठ लोक अभियोजक होंगे ताकि सुनवाई की प्रक्रिया तेज हो सके. इस संबंध में संप्रग सरकार के दौरान अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनताति अत्याचार निवारण संशोधन अध्यादेश मार्च 2014 में लोकसभा चुनाव से पहले लाया गया था. चुनाव के बाद बनी नयी सरकार ने उस साल जुलाई में संसद में विधेयक पेश किया था जो स्थायी समिति को भेजा गया.

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