चर्चा के बाद जब ‘राष्ट्र गौरव अपमान निवारण संशोधन विधेयक 2026 पास हुआ, उस वक्त विपक्ष के सदस्य सदन में मौजूद नहीं थे. विपक्षी दलों के सांसदों ने गृह मंत्री अमित शाह की सदन में अनुपस्थिति समेत अन्य मुद्दों को लेकर पहले ही वॉकआउट कर दिया था.
तुष्टीकरण के कारण वंदे मातरम् को नहीं मिला उचित सम्मान: नित्यानंद राय
विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि यह कदम देशवासियों की भावनाओं को ध्यान में रखकर उठाया गया है. वंदे मातरम् स्वतंत्रता संग्राम के दौरान हर भारतीय का प्रिय नारा था. उन्होंने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि तुष्टीकरण की राजनीति के कारण आजादी के बाद वंदे मातरम् को वह सम्मान नहीं मिला, जिसका वह हकदार था. इसी नीति की वजह से इसके केवल दो अंतरों को ही सरकारी कार्यक्रमों में स्वीकार किया गया था. नित्यानंद राय ने याद दिलाया कि आजादी के पहले दिन सरदार वल्लभभाई पटेल के निर्देश पर पंडित ओंकार नाथ ठाकुर ने आकाशवाणी पर पूरा 'वंदे मातरम्' गाया था.
क्यों पड़ी विधेयक की जरूरत?
1971 के मूल अधिनियम में संशोधन करने वाले इस विधेयक के उद्देश्यों में स्पष्ट किया गया है कि 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा में डॉ राजेंद्र प्रसाद ने 'वंदे मातरम्' को राष्ट्रगान 'जन गण मन' के समान दर्जा देने की बात कही थी. हालांकि, अब तक कोई ऐसा कानून नहीं था जो राष्ट्रगीत के अपमान को रोक सके.
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