भारत ने 108 सैन्य उपकरणों की खरीद पर लगाया प्रतिबंध, रक्षा मंत्रालय का बड़ा फैसला, जानिए क्या है इसके पीछे की योजना

भारत में घरेलू रक्षा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि, आत्मनिर्भर भारत के तहत अब देश में ही कई रक्षा उपकरण का निर्माण किया जाएगा. रक्षा मंत्रालय (Defence Ministry) ने हवाई अग्रिम चेतावनी प्रणाली, टैंक, रडार जैसे 108 सैन्य हथियारों और रक्षा प्रणालियों के आयात पर रोक लगाएगा.

  • स्वदेशी रक्षा उद्योग को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम

  • रक्षा संबंधी 108 उपकरणों की खरीद पर रोक

  • देश में ही बनेंगे ये उपकरण, निर्भरता को बढ़ावा देने के लिए उठाया कदम

भारत में घरेलू रक्षा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि, आत्मनिर्भर भारत के तहत अब देश में ही कई रक्षा उपकरण का निर्माण किया जाएगा. रक्षा मंत्रालय (Defence Ministry) ने हवाई अग्रिम चेतावनी प्रणाली, टैंक, रडार जैसे 108 सैन्य हथियारों और रक्षा प्रणालियों के आयात पर रोक लगाएगा. इसकी मंजूरी दे दी गई है.

बीते साल सरकार ने जारी की थी नकारात्मक लिस्टः गौरतलब है कि, सरकार ने बीते साल रक्षा संबंधी 101 वस्तुओं के आयात बंद करने के लिए कारात्मक सूची जारी की थी. अब इस साल भी सरकार ने 108 रक्षा उपकरणों के आयात पर रोक लगा दी है. ताकी देशी रक्षा उद्योग को बढ़ावा मिल सके. पहली सूचि में रोक के लिए आर्टिलरी गन, कम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल, क्रूज मिसाइल, इलेक्ट्रानिक युद्ध प्रणाली समेत अन्य हथियारों को शामिल किया गया था.

2021 से 2025 तक प्रभावी होगा प्रतिबंधः इधर, रक्षा मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि, 108 वस्तुओं के आयात पर रोक दिसंबर 2021 से दिसंबर 2025 की अवधि में प्रभावी रहेगा. वहीं, रक्षा मंत्रालय का ये भी कहना है कि, दूसरी सूची के तहत रोक का मकसद सार्वजनिक क्षेत्र और निजी रक्षा विनिर्माण उद्योगों को बढ़ावा देना है.

देश में दिया जाएगा रक्षा निर्माण को बढ़ावाः रक्षा मंत्रालय का कहना है कि, दूसरी लिस्ट में शामिल सभी 108 वस्तुओं को अब रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया 2020 के तहत स्वदेशी स्रोतों से खरीदा जाएगा. ताकी देश में रक्षा उद्योग को बढ़ावा मिलेगा. बता दें, रक्षा मंत्रालय की नई रक्षा खरीद नीति के तहत 2025 तक 1.75 लाख करोड़ रुपये तक खर्च करने का अनुमान है. बता दे, भारत 50 से ज्यादा देशों में रक्षा उपकरण का निर्यात करता है.

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Posted by: Pritish Sahay

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