छत्तीसगढ़ में अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण पर उच्च न्यायालय ने लगायी रोक

बिलासपुर(छत्तीसगढ़) : छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए आरक्षण 14 प्रतिशत से बढ़ा कर 27 प्रतिशत किये जाने के राज्य सरकार के फैसले पर फिलहाल रोक लगा दी है. राज्य के महाधिवक्ता सतीशचंद्र वर्मा ने बताया कि मुख्य न्यायाधीश पीआर रामचंद्र मेनन और न्यायमूर्ति पीपी साहू की पीठ ने शुक्रवार को […]

बिलासपुर(छत्तीसगढ़) : छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए आरक्षण 14 प्रतिशत से बढ़ा कर 27 प्रतिशत किये जाने के राज्य सरकार के फैसले पर फिलहाल रोक लगा दी है.

राज्य के महाधिवक्ता सतीशचंद्र वर्मा ने बताया कि मुख्य न्यायाधीश पीआर रामचंद्र मेनन और न्यायमूर्ति पीपी साहू की पीठ ने शुक्रवार को आरक्षण के मुद्दे पर अपना आदेश जारी किया. उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने विगत दिनों नयी आरक्षण नीति के तहत राज्य में 72 प्रतिशत और सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से पिछड़े तबके को दिये गये 10 प्रतिशत आरक्षण सहित कुल 82 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया था. इसके खिलाफ वेदप्रकाश सिंह ठाकुर और अन्य ने उच्च न्यायालय में याचिकाएं दायर की थी. वर्मा ने बताया कि राज्य सरकार ने अनुसूचित जनजाति (एसटी) को 32 प्रतिशत, अनुसूचित जाति (एससी) को 13 प्रतिशत और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को 27 प्रतिशत सहित कुल 72 प्रतिशत आरक्षण तथा केंद्र सरकार की व्यवस्था के अनुसार सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर तबके के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण सहित कुल 82 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया था.

पीठ ने मामले की सुनवाई के बाद एक अक्तूबर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर अनुसूचित जाति के लिए आरक्षण 12 प्रतिशत से बढ़ा कर 13 प्रतिशत करने और अन्य पिछड़ा वर्ग का आरक्षण 14 प्रतिशत से बढ़ा कर 27 प्रतिशत करने की घोषणा की थी. राज्य में अनुसूचित जनजाति को 32 फीसदी आरक्षण प्राप्त है.

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