दिल्ली : मोबाइल फोन पर कॉलर की पहचान करने वाले ऐप्प ट्रूकॉलर के जरिये आपका नाम, फोन नंबर, इमेल एड्रेस सहित अन्य डेटा एक प्राइवेट इंटरनेट फोरम पर बिक्री के लिए उपलब्ध है. डेटा की खरीद बिक्री पर नजर रखने वाले एक साइबर सिक्योरिटी एनालिस्ट ने यह खुलासा किया है.
ट्रूकॉलर के लगभग 14 करोड़ यूजर हैं. इसमें 60 प्रतिशत यूजर भारतीय हैं जिनका डेटा कथित डार्क वेब पर 1.5 लाख रुपये (2000 यूरो) तक में बेचा जा रहा है.
जबकि ग्लोबल यूजर के डेटा की कीमत 19.5 लाख रुपये (25,000 यूरो) है. बिक्री के लिए उपलब्ध डेटा का एक नमूना देखने पर पता चला कि इसमें यूजर का निवास स्थान और मोबाइल सर्विस प्रोवाइडर जैसी जानकारियां भी शामिल हैं. ट्रूकॉलर पर बिना किसी क्रम के की गयी नंबरों की सर्च में जो रिजल्ट मिले वे बिक्री के लिए जारी डेटा से पूरी तरह मेल खाते थे. हालांकि, ट्रूकॉलर ने डेटा लीक मामले से इंकार किया है.
कंपनी ने सफाई देते हुए कहा कि उसने अपने यूजर्स की ओर से ही डेटा की अनाधिकृत कॉपी करने के मामले पाये हैं. बता दें कि स्वीडन की यह कंपनी अपने प्रीमियम सर्विस के तहत सब्सक्राइबर्स को पेमेंट करने के बाद जितने चाहें उतने नंबरों को सर्च करने का मौका देता है. ट्रूकॉलर ने साल की शुरुआत में अपने प्लेटफॉर्म का गलत इस्तेमाल करने के शक वाले यूजर अकाउंट्स की जांच शुरू की थी, जो अभी तक अपडेट नहीं हुआ है.
फेमस लोगों के नाम और फोटो से लोग
रजिस्टर कर रहे नंबर, लगा रहे चूना
बीसीसीआइ सिलेक्टर के नाम से ठगी
आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले के रहने वाले बुदुमुरी नागाराजु ने अपना नंबर बीसीसीआइ के चीफ सिलेक्टर एमएसके प्रसाद के नाम और फोटो के साथ रजिस्टर किया. इसके बाद कॉल करके कई बड़े बिजनेसमैन को लाखों का चूना लगाया. एमएसके द्वारा केस दर्ज करने के बाद उसे अरेस्ट किया गया.
छत्तीसगढ़ के एक मंत्री भी फंसे
छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य एवं पंचायत मंत्री टीएस सिंहदेव की फोटो और नाम के साथ वहां के तीन युवकों ने एक नंबर रजिस्टर कराया. जब भी कोई फोन करता था तो टीएस सिंहदेव का नाम व प्रोफाइल में फोटो नजर आता था. कॉल करने पर सामने से टीएस सिंहदेव के यहां काम करने की बात कहकर धमकाया जाता था.
यह हमारे डेटाबेस पर हमला नहीं है क्योंकि हमारे सर्वर पर स्टोर किया गया डाटा पूरी तरह सुरक्षित है. डेटा की अनाधिकृत कॉपी करने के मामले पाये गये हैं. जांच जारी है. प्रवक्ता, ट्रूकॉलर
