नयी दिल्ली: जदयू ने भाजपा के सहयोगी अपना दल के सुर में सुर मिलाते हुए संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए प्रस्तावित 33 फीसदी आरक्षण के अंदर एससी, एसटी और ओबीसी के लिए आरक्षण की मांग की है. राजग सरकार द्वारा महिला आरक्षण विधेयक पारित कराने की प्रतिबद्धता जताए जाने के बीच यह मुद्दा फिर से सुर्खियों में है.
पार्टी महासचिव के. सी. त्यागी ने बयान जारी कर कहा, ‘‘जद यू, भाजपा के सहयोगी अपना दल की सांसद अनुप्रिया पटेल के बयान का पूरा समर्थन करता है जिसमें ओबीसी के लिए अलग से आरक्षण की मांग की गई है.’’ उन्होंने कहा कि महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण वाले विधेयक में ओबीसी और एससी, एसटी के लिए कोटा के अंदर कोटा होना चाहिए.
अपना दल की सांसद अनुप्रिया पटेल ने कल एक साक्षात्कार में कहा कि उनकी पार्टी विधेयक में ओबीसी और एससी, एसटी के लिए कोटा के तहत कोटा का समर्थन करती है. पटेल उत्तरप्रदेश के मिर्जापुर से सांसद हैं और उनकी पार्टी अपना दल लोकसभा चुनाव में भाजपा की सहयोगी है.महिला विधेयक को राज्यसभा में भारी हंगामे के बीच मार्च 2010 में पारित किया जा चुका है लेकिन लोकसभा में इसे पेश नहीं किया गया है. भाजपा नीत राजग सरकार ने संसद की संयुक्त बैठक में नौ जून को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के अभिभाषण के माध्यम से इस विधेयक को लेकर अपनी प्रतिबद्धता जताई है.
त्यागी ने कहा, अनुप्रिया पटेल की मांग दिखाती है कि इस मुद्दे पर राजग में भी सहमति नहीं है.
उन्होंने कहा, ‘‘पहले भी भाजपा नेता उमा भारती ने इस तरह की मांग का समर्थन किया था जबकि भाजपा नेता गोपीनाथ मुंडे ने भी लोकसभा में कोटा के अंदर कोटा की मांग की थी.’’ उन्होंने कहा कि बसपा प्रमुख मायावती, सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव और अन्य ने भी पहले ऐसी ही मांगें की थीं. उन्होंने कहा, ‘‘सरकार को उन पर ध्यान देना चाहिए.’’ दिलचस्प बात यह है कि राज्यसभा में 2010 में विधेयक को पारित कराने में जद यू ने संप्रग का समर्थन किया था.
जदयू अध्यक्ष शरद यादव की जहां अपनी आपत्तियां हैं वहीं पार्टी ने बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के विधेयक का समर्थन करने के रुख को देखते हुए इसका समर्थन किया था. त्यागी ने कहा कि जद यू ने उस समय राज्यसभा में इस आश्वासन पर संप्रग का समर्थन किया था कि वंचित तबके की चिंताओं और जरुरतों को इसमें शामिल किया जाएगा.
